विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

श्रीकृष्ण का नाम 'केशव' कैसे पड़ा? पढ़ें इसके पीछे छिपी पौराणिक कथा

Published: Thu, 27 Aug 2026 07:58 PM (IST)

भगवान श्रीकृष्ण को 'केशव' नाम केशी नामक दैत्य का वध करने के कारण मिला। कंस द्वारा भेजे गए इस विशाल ...और पढ़ें

श्रीकृष्ण का केशव स्‍वरूप। (Picture Credit- AI Generated)

श्रीकृष्ण का केशव स्‍वरूप। (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. श्रीकृष्ण ने केशी नामक शक्तिशाली दैत्य का वध किया।

  2. कंस ने केशी को श्रीकृष्ण को मारने वृंदावन भेजा था।

  3. केशी के वध के बाद श्रीकृष्ण 'केशव' कहलाए।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान श्रीकृष्ण को हिंदू धर्म में अनेक नामों से जाना जाता है। इनमें कान्हा, गोपाल, गोविंद, माधव और केशव जैसे नाम बहुत लोकप्रिय हैं। लेकिन श्रीकृष्‍ण के हर नाम के पीछे कोई न कोई विशेष अर्थ या कथा जुड़ी हुई है। 'केशव' नाम भी भगवान श्रीकृष्ण की एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ माना जाता है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने वृंदावन में केशी नामक दैत्य का वध किया था। इसी कारण उन्हें केशव नाम से पुकारा जाने लगा। इस कथा का उल्लेख श्रीमद्भागवत पुराण में मिलता है।

कंस ने भेजा था केशी दैत्य

जब कंस को यह पता चला कि श्रीकृष्ण ही उसके अंत का कारण बनेंगे, तो उसने उन्हें मारने के लिए कई राक्षसों को भेजा। इन्हीं में केशी नाम का एक बहुत शक्तिशाली दैत्य भी था। कंस के आदेश पर केशी वृंदावन पहुंचा। केशी का रूप बहुत ही भयानक और विशाल घोड़े जैसा था। उसके आने से पूरे ब्रज में डर का माहौल बन गया था। उसके तेज दौड़ने से धरती कांपने लगी थी और लोग भयभीत हो गए थे।

श्रीकृष्ण और केशी का युद्ध

केशी ने श्रीकृष्ण को देखकर उन्हें मारने के लिए हमला कर दिया। उसने अपने पैरों से श्रीकृष्ण पर प्रहार करने का प्रयास किया। श्रीकृष्ण ने उसके हमले से बचते हुए उसके पैरों को पकड़ लिया और अपनी शक्ति से दूर फेंक दिया। कुछ देर दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ। कुछ समय बाद केशी ने अपना विशाल मुंह खोलकर भगवान श्रीकृष्ण को निगलने की कोशिश की। कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण ने अपना बायां हाथ केशी के मुंह में डाल दिया। उनका हाथ धीरे-धीरे इतना विशाल और कठोर हो गया कि केशी को सांस लेने में कठिनाई होने लगी और उसका अंत हो गया ।

इसी कारण श्रीकृष्‍ण कहलाए 'केशव'

केशी दैत्य का वध करने के कारण श्रीकृष्ण को केशव नाम से पुकारा जाने लगा। 'केशव' नाम को सामान्य रूप से अर्थ यही है 'केशी का वध करने वाला'। लेकिन धार्मिक दृष्टि से इसका अर्थ है 'क' मतलब ब्रह्मा और 'ईश' मतबल शिव होता है।

अत: धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार श्रीकृष्‍ण के केशव स्‍वरूप की पूजा करने से त्रिदेवों की पूजा पूर्ण हो जाती है।

यह भी पढ़ें- लड्डू गोपाल के सीने पर क्यों है पैर का निशान? पढ़ें इस रहस्य से जुड़ी पौराणिक कथा

यह भी पढ़ें- माखनचोर, गिरधारी या रणछोड़? कृष्ण के इन नामों का असली अर्थ शायद ही जानते होंगे आप

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।