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गरुड़ पुराण का रहस्य: मृत्यु के बाद शव को जमीन पर क्यों लिटाया जाता है?

Published: Tue, 01 Sep 2026 05:32 PM (IST)

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद शव को अंतिम संस्कार से पहले जमीन पर रखने के पीछे कई धार्मिक ...और पढ़ें

मृत्यु के बाद शव को जमीन पर रखने के पीछे गरुड़ पुराण के गहरे रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

मृत्यु के बाद शव को जमीन पर रखने के पीछे गरुड़ पुराण के गहरे रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. शरीर का पंचतत्व में विलीन होने की यात्रा का आरंभ।

  2. मृतक का मिट्टी से जुड़ाव और विनम्रता का बोध कराता है।

  3. जीवन के एक अध्याय की पूर्णता का महत्वपूर्ण प्रतीक।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मृत्यु के बाद के कुछ ऐसे नियम हैं जिनका पालन जरूरी माना जाता है। कई ऐसे रहस्य भी हैं जो मृत शरीर से जुड़े हुए हैं और जिनका जिक्र गरुड़ पुराण में भी किया गया है।

अंतिम संस्कार से पहले भी कुछ ऐसी रस्में निभाई जाती हैं जिनसे मृत आत्मा को मुक्ति मिलती है। सभी संस्कारों का पालन मृतक के करीबी लोग करते हैं। गरुड़ पुराण में कई ऐसी बातें लिखी हैं जैसे मृतक को स्नान कराना, उसे नए वस्त्र पहनाना और घर में 13 दिनों तक उसके नाम का दीपक जलाना।

ऐसी ही एक प्रथा है मृतक के शव को जमीन पर रखने की। अक्सर देखा जाता है कि मृत व्यक्ति को सबसे पहले थोड़ी देर के लिए जमीन पर लिटाया जाता है फिर उसके बाद उसकी अंत्येष्टि की तैयारी की जाती है। आइए आपको बताते हैं इसके पीछे के कारणों के बारे में।

शरीर के पंचतत्व में विलीन होना

हिंदू धर्म में मनुष्य के शरीर को पंचमहाभूतों पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से निर्मित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तब उसके बाद शरीर पुनः इन्हीं तत्वों में विलीन होने की यात्रा शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया को शरीर का पंचतत्वों में विलीन होना माना जाता है।

इसी कारण से अंतिम संस्कार की प्रत्येक परंपरा में से एक यह अनिवार्य रस्म मानी जाती है और यह आत्मा को मुक्ति दिलाने का भी एक तरीका माना जाता है। गरुड़ पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में मृत्यु के बाद किए जाने वाले सबसे जरूरी संस्कारों में से एक है शव को जमीन पर लिटाना और इसका पालन हर एक समुदाय में किया जाता है।

मृत्यु के बाद शरीर अंतिम यात्रा पर निकल जाता है

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृत्यु के बाद शरीर अपनी अंतिम यात्रा शुरू करता है और अंततः पंचतत्वों में विलीन हो जाता है। इसी कारण से सदियों से मृतक को सबसे पहले जमीन पर लिटाने की परंपरा शुरू हुई। यह इस बात का प्रतीक भी मानी जाती है कि अब मृतक का पूरा शरीर प्रकृति को समर्पित होने की प्रक्रिया में आगे बढ़ रहा है।

शरीर के मिट्टी से जुड़ाव का प्रतीक

मृत शरीर को सबसे पहले जमीन पर लिटाने का एक कारण यह भी है कि यह प्रक्रिया इस बात को बताती है कि व्यक्ति इस संसार में चाहे जितना धन क्यों न अर्जित कर ले, लेकिन अंत में उसे उसी मिट्टी में मिल जाना है। यह परंपरा जीवित व्यक्तियों को भी विनम्रता और जीवन की नश्वरता का बोध कराती है।

जमीन पर शव को लिटाने का मतलब यही है कि व्यक्ति का जुड़ाव जीवित अवस्था में भी जमीन से होना चाहिए और उसे इस अहम में नहीं जीना चाहिए कि उसके पास कितना धन और शोहरत है।

जीवन के अध्याय की पूर्णता का प्रतीक

मृत व्यक्ति के शव को धरती पर लिटाकर यह संकेत दिया जाता है कि जीवन का एक चरण पूरा हुआ और अब आत्मा की शांति के लिए एक नई यात्रा शुरू होने जा रही है।

मनुष्य का शरीर नष्ट हो जाता है, लेकिन आत्मा की दूसरी यात्रा शुरू हो जाती है। ऐसे में व्यक्ति के कर्म ही उसकी वास्तविक पहचान बन सकते हैं। इस प्रकार मृत्यु के बाद शव को जमीन पर लिटाने की परंपरा केवल एक धार्मिक रस्म नहीं है बल्कि यह व्यक्ति के अंतिम से को स्वीकारने का प्रतीक भी है।

वास्तव में जीवन और मृत्यु के इस पड़ाव में शव को अंतिम संस्कार से पहले जमीन पर लिटाना इस बात का प्रतीक है कि जीवित अवस्था में व्यक्ति चाहे जितना भी ऊपर तक पहुंच जाए, मृत्यु एक शाश्वत सत्य है जिसे सभी को स्वीकारना पड़ता है।

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