किन लोगों को नहीं रखना चाहिए सावन सोमवार व्रत? अभी जान लें इससे जुड़े सही नियम
सावन सोमवार व्रत महादेव की कृपा पाने के लिए शुभ माना जाता है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में इसे टालना ...और पढ़ें

सोमवार व्रत के नियम (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति व्रत रखने से बचें।
गर्भवती महिलाओं को शिशु के स्वास्थ्य हेतु व्रत नहीं रखना चाहिए।
दिखावे या कटु वचन बोलने वाले व्रत न करें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महादेव की कृपा प्राप्त करने के लिए सावन का महीना बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पवित्र महीने में शिव जी का अभिषेक करने से जीवन में आने वाले सभी दुख और दर्द दूर होते हैं। सावन सोमवार व्रत करने से वैवाहिक जीवन खुशियों से भरा रहता है और कुंवारी कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी मिलता है।
शास्त्रों में बताया गया है कि सावन सोमवार का व्रत कुछ लोगों को नहीं रखना चाहिए। अब इस बात को सुनकर आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा कि किन लोगों को यह व्रत न रखने की सलाह दी जाती है, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं विस्तार से।
यह व्रत किन्हें नहीं रखना चाहिए?
- जो लोग किसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं, तो उन्हें सावन सोमवार का व्रत नहीं रखना चाहिए। ऐसी परिस्थिति में व्रत रखने से सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन आप पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
- इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को सावन सोमवार व्रत न रखने की सलाह दी जाती है। गर्भावस्था के समय व्रत करने से सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
- जो लोग दिखावे के लिए सावन सोमवार का व्रत रखते हैं, तो उन्हें यह व्रत नहीं करना चाहिए। ऐसे लोगों का व्रत कभी भी सफल नहीं होता है और महादेव की कृपा प्राप्त नहीं होती है। इसलिए शास्त्रों में बताया गया है कि किसी भी व्रत को सच्चे भाव से ही करना चाहिए। तभी शुभ फल की प्राप्ति होती है।
- जिन लोगों का आचरण सही नहीं होता है और कटु वचन बोलते हैं, तो ऐसे में लोगों को सावन सोमवार का व्रत नहीं रखना चाहिए। ऐसे लोगों की साधना से महादेव प्रसन्न नहीं होते हैं। इसलिए जीवन में कभी भी क्रोध और कटु वचन नहीं बोलना चाहिए।
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सोमवार व्रत के नियम
- सावन सोमवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- मंदिर में भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग का अभिषेक करें।
- महादेव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और अक्षत अर्पित करें।
- दीपक जलाकर आरती करें और व्रत कथा का पाठ करें।
- फल और मिठाई का भोग लगाएं।
- इस व्रत को निर्जला या फलाहारी व्रत रख सकते हैं।
- इस दिन विशेष चीजों का दान जरूर करना चाहिए।
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