भगवान श्री कृष्ण ने कब-कब चलाया अपना सुदर्शन चक्र?
भगवान श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र उनकी दिव्य शक्ति का प्रतीक है, जिसका उपयोग उन्होंने धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए किया।

श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र के प्रसंग । (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
शिशुपाल का वध कर धर्म की रक्षा की।
पौंड्रक जैसे अहंकारी राजा का संहार किया।
जयद्रथ वध में सूर्य को ढककर सहायता की।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र उनकी सबसे शक्तिशाली दिव्य शक्तियों और अस्त्रों में से एक माना जाता है। इसे धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश का प्रतीक माना जाता है। हरिवंश पुराण और महाभारत से जुड़ी विभिन्न कथाओं में श्रीकृष्ण द्वारा सुदर्शन चक्र के प्रयोग के कई प्रसंग मिलते हैं। कहीं उन्होंने इसका उपयोग दुष्ट राजाओं के वध के लिए किया, तो कहीं धर्म की रक्षा के लिए इसकी शक्ति का सहारा लिया। आइए जानते हैं श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से जुड़े प्रमुख प्रसंग।
शिशुपाल का वध
सुदर्शन चक्र के सबसे प्रसिद्ध प्रसंगों में शिशुपाल वध की कथा आती है। राजसूय यज्ञ के दौरान शिशुपाल ने भगवान श्रीकृष्ण का बार-बार अपमान किया। श्रीकृष्ण ने उसकी माता, जो रिश्तें में उनकी बुआ लगती थीं, को वचन दिया था कि वे शिशुपाल की सौ गलतियों को क्षमा करेंगे। जब शिशुपाल की सौ गलतियां पूरी हो गईं और उसने फिर भी अपमान करना जारी रखा, तब श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र चलाया। चक्र ने शिशुपाल का सिर धड़ से अलग कर दिया थे और उसकी मृत्यु हो गई थी।
पौंड्रक का वध
पौंड्रक नाम का एक राजा स्वयं को असली वासुदेव बताता था। वह श्रीकृष्ण की तरह शंख, चक्र और अन्य चिह्न धारण करता था और खुद को भगवान समझता था। दिखने में भी वह श्री कृष्ण की तरह ही मनमोहक था। लकिन दुष्ट व्यवहार का होने के कारण उसे कोई पसंद नहीं करता था। जब उसका श्रीकृष्ण से युद्ध हुआ, तो युद्ध के अंत में सुदर्शन चक्र से पौंड्रक का वध हुआ।
जयद्रथ वध के समय सुदर्शन का प्रयोग
महाभारत युद्ध के 14वें दिन अर्जुन ने प्रतिज्ञा की थी कि सूर्यास्त से पहले वह जयद्रथ का वध करेंगे। अर्जुन को समय पर जयद्रथ तक पहुंचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया का सहारा लिया। परंपरागत कथाओं में यह भी कहा जाता है कि उन्होंने सुदर्शन चक्र से सूर्य को कुछ समय के लिए ढक दिया, जिससे सूर्यास्त जैसा प्रतीत हुआ। जयद्रथ को लगा कि सूर्यास्त हो चुका है और वह सामने आ गया। तभी श्रीकृष्ण ने अर्जुन को संकेत दिया और अर्जुन ने जयद्रथ का वध कर दिया।
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अत: सुदर्शन चक्र को श्रीकृष्ण की दिव्य शक्ति का ही रूप माना जाता है। पुराणों में एक ऐसा प्रसंग भी मिलता है, जहां श्री राधा रानी ने भी श्री कृष्ण के सुदर्शन से एक राक्षस का वध किया था। सुदर्शन का उद्देश्य अधर्म का नाश और धर्म की रक्षा करना ही था।
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