पंजाबी शादी में 'वटना सेरेमनी' क्या होती है, हिंदू विवाह से कैसे अलग है यह रस्म?
पंजाबी शादियों में 'वटना' एक महत्वपूर्ण रस्म है, जो दूल्हा-दुल्हन को बुरी नजर से बचाने और उनके सौंदर्य को बढ़ाने के लिए शादी से एक दिन पहले की जाती है ...और पढ़ें

पंजाबी शादी की वटना रस्म: महत्व, विधि और हिंदू विवाह से समानता (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पंजाबी शादियां अपनी कभी न खत्म होने वाली मस्ती और उत्साह के लिए न सिर्फ भारत में बल्कि पूरे विश्व में मशहूर हैं।
पंजाबी शादियों में मस्ती, खाना और पारंपरिक कपड़े सबसे खास होते हैं। वैसे तो हिंदू शादियों में भी कुछ ऐसी रस्में हैं जो समारोह का मजा दोगुना कर देती हैं, लेकिन पंजाबी शादी की रस्मों की बात ही निराली है।
इन शादियों में एक रस्म है 'वटना' और ये इस वजह से महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि ये दूल्हे और दुल्हन को किसी भी बुरी नजर से बचाती है और शादी की पवित्रता को बनाके रखती है। ये रस्म हिंदू शादी की हाली की रस्म की ही तरह होती है। इसे दूल्हे और दुल्हन दोनों के परिवार के लोग मनाते हैं।
पंजाब के कुछ हिस्सों में इसे 'मइयां' के नाम से भी जाना जाता है। पहले, यह रस्म दूल्हा और दुल्हन के परिवारों में अलग-अलग की जाती थी, लेकिन अब कुछ लोग इसे दोनों परिवारों के लिए एक साथ मिलकर भी मनाते हैं। आइए आपको बताते हैं क्या है वटना और क्यों है ये खास?
वटना की रस्म क्या है?
आमतौर पर पंजाबी शादी में वटना रस्म शादी वाले दिन से एक दिन पहले की जाती है। दूल्हे या दुल्हन के सिर के ऊपर 'फुलकारी' जो एक तरह का दुपट्टा होता है और दूल्हा या दुल्हन उसके नीचे लकड़ी की एक छोटी चौकी पर बैठते हैं। यह रस्म खुली जगह पर होती है, जहां सभी रिश्तेदार, परिवार वाले और दोस्त इकट्ठा होकर शादी के गीत गाते हैं।
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इसमें उस जगह को रंगोली से सजाया जाता है जहां दूल्हा या दुल्हन बैठते हैं। मुख्य रूप से वटना के लिए हल्दी, बेसन और सरसों के तेल से उबटन तैयार किया जाता है और इसे दूल्हे या दुल्हन के पूरे शरीर पर लगाया जाता है। दोनों पक्षों के रिश्तेदार एक-एक करके उबटन लगाते हैं।
वटना रस्म का क्या महत्व है?
वटना की रस्म में दूल्हे और दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है और ऐसा माना जाता है कि ये दुल्हन के सौंदर्य को बढ़ाती है। ये रस्म कई सालों से चली आ रही है क्योंकि ये दुल्हन और दूल्हे के सौंदर्य को बढ़ाने के साथ शादी के इस पवित्र बंधन को अटूट बनाने का आशीर्वाद भी देती है। सालों पहले जब खूबसूरती के पैमाने प्राकृतिक थे, तब इस रस्म की शुरुआत हुई थी और आज भी ये पंजाबी शादियों की रस्मों का एक अहम हिस्सा है।
वटना समारोह में कौन-कौन हिस्सा लेता है?
वटना समारोह में दूल्हे और दुल्हन के परिवार के सभी सदस्य और करीबी रिश्तेदार शामिल होते हैं और अपने शुभ आशीर्वाद के रूप में दूल्हे और दुल्हन को हल्दी या उबटन लगाते हैं।
अगर हम हिंदू शादियों से इस रस्म की तुलना करते हैं तो ये हल्दी सेरेमनी का ही एक रूप है, बस इसका नाम बदलकर वटना रखा गया है जिसका अर्थ भी हल्दी होता है।
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