सिख शादी में कौन-कौन सी रस्में होती हैं? रोका से आनंद कारज तक, जानें विवाह की परंपराओं के बारे में
सिख शादी में रोका से लेकर आनंद कारज तक कई महत्वपूर्ण रस्में निभाई जाती हैं, जो दो परिवारों को जोड़ती हैं। ये परंपराएं रिश्ते को सिर्फ एक जन्म के लिए न ...और पढ़ें

सिख विवाह की रस्में: रोका, कुरमई और आनंद कारज का महत्व (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शादी को सिर्फ दो दिलों के बीच का संबंध नहीं माना जाता है, बल्कि यह दो परिवारों को मिलाने की परंपरा भी है। शादी में अलग-अलग रस्में दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवार को आपस में जोड़ती हैं।
जिस तरह से हिंदू शादियों में सात फेरे की रस्म को खास माना जाता है। उसी तरह से सिख शादियों में भी कुछ ऐसी रस्में हैं जो शादी के पूर्ण समारोह को खास बनाती हैं।
गुरूद्वारे में होने वाली ये शादियां काफी हद तक हिंदू शादियों से मिलती-जुलती हैं, लेकिन कुछ ऐसी रस्में भी हैं जो अलग हैं और इनका महत्व भी बहुत ज्यादा है। शादी की ये रस्में रिश्ते को सिर्फ एक जन्म के लिए नहीं बल्कि जन्म-जन्मांतर के लिए अटूट बनाती हैं। आइए आपको बताते हैं सिख शादी में निभाई जाने वाली शादी की सभी रस्मों के बारे में।
रोका सेरेमनी
सिख शादी की शुरुआत होती है रोका सेरेमनी से। यह दोनों परिवारों की तरफ से शादी को औपचारिक रूप से मंजूरी देने का एक तरीका है। इसमें दोनों परिवार के लोग कुछ उपहार लाकर दूल्हे-दुल्हन के घर के लोगों को देते हैं। एक तरह से यह इस बात का प्रतीक है कि दो पक्षों के लोगों की तरफ से शादी को मनूरी मिल गई है।
कुरमई या सगाई
सगाई की रस्म, जिसे सिख परिवारों में 'कुरमई' कहा जाता है, इसमें दूल्हा और दुल्हन एक दूसरे को अंगूठियां पहनानते हैं। यह हिंदू शादियों जैसी ही रस्म होती है और शादी की मंजूरी के बाद का चरण माना जाता है। यह रस्म अक्सर गुरुद्वारे या दूल्हे के घर पर होती है।
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ढोलकी या संगीत
ढोलकी नाइट्स शादी से पहले की उत्साह भरी रस्मों में से एक माना जाता है जब दोनों परिवार के लोग एक साथ इकट्ठे होकर पंजाबी गाने गाते हैं और संगीत, डांस और आपसी मेल-जोल का पूरा आनंद उठाते हैं।
मेहंदी सेरेमनी
मेहंदी सेरेमनी लगभग सभी धर्मों की शादियों की एक खास रस्म मानी जाती है। जहां हिंदू शादियों में यह सुहाग की एक सामग्री मानी जाती है, वहीं सिख धर्म में इसे समृद्धि और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। शादी से पहले दूल्हे और दुल्हन दोनों के हाथ में मेहंदी लगाई जाती है।
चूड़ा सेरेमनी
सिख शादी की एक खास रस्म चूड़ा सेरेमनी मानी जाती है जिसमें दुल्हन के मामा उसके लिए लाल और सफेद रंग का चूड़ा पहनाते हैं। यह रस्म खुशी, सौभाग्य और वैवाहिक सुख का प्रतीक मानी जाती है।
कलीरे सेरेमनी
कलीरे एक विशेष प्रकार के गहने होते हैं जो दुल्हन के चूड़े के बीच में पहनाए जाते हैं। इस रस्म में कुछ हंसी-ठिठोली भी होती है जैसे कलीरों को कुंवारी लड़कियों के सिर पर हिलाया जाता है और ऐसा कहा जाता है कि जिसके ऊपर भी कलीरे टूटकर गिरते हैं उसकी शादी जल्दी हो होती है। इसे शगुन की निशानी के रूप में देखा जाता है।
वटना सेरेमनी
पंजाब में हल्दी को वटना कहा जाता है। इस सेरेमनी में दूल्हा और दुल्हन को हल्दी का लेप लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह शरीर को शुद्ध करती है और दूल्हे-दुल्हन को नकारात्मक ऊर्जाओं से बचाती है।
सेहरा बंदी
जिस दिन बारात घर से निकलती है तब दूल्हे के घर में 'सेहरा' बांधा जाता है। इस रस्म के दौरान बड़े-बुज़ुर्ग दूल्हे को खुशहाल और सफल वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देते हैं।
बारात
दूल्हा अपने परिवार और करीबियों को लेकर बारात के साथ निकलता है जिसमें डांस, ढोल की थाप और जश्न का माहौल होता है। यह पंजाबी शादियों के खुशी भरे माहौल को दिखाता है।
मिलनी सेरेमनी
जब दूल्हा बारात लेकर दुल्हन के घर पहुंचता है तब मिलनी की रस्म निभाई जाती है। यह दुल्हन और दूल्हे के परिवारों की औपचारिक मुलाकात होती है। इसमें बड़े-बुज़ुर्ग एक-दूसरे को उपहार देते हैं।

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आनंद कारज
आनंद कारज मुख्य रूप से फेरों की रस्म को कहा जाता है। इसमें दूल्हा और दुल्हन गुरुद्वारे में गुरु ग्रंथ साहिब के चारों ओर चार पवित्र फेरे लेते हैं। यह रस्म हिंदू शादियों से थोड़ी अलग मानी जाती है क्योंकि इसमें सात की जगह चार फेरे ही लिए जाते हैं।
विदाई
सिख शादी में भी विदाई की रस्म हिंदू शादियों जैसी ही होती हैं और इस दौरान दुल्हन पीहर को छोड़कर ससुराल जाने की तैयारी करती है। यह प्यार और उसके जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है।
दूल्हे के घर में गृह प्रवेश
इस रस्म में दुल्हन का उसके नए घर यानी कि ससुराल में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया जाता है। इस रस्म में दूल्हे की मां दूल्हे और दुल्हन के सिर के ऊपर से 7 बार पानी उतारती हैं और ये इस बात का प्रतीक है कि उनके वैवाहिक रिश्ते पर किसी की नजर न लगे। इस रस्म के बाद दुल्हन घर के भीतर प्रवेश करती है।
सिख शादी की ये सभी रस्में बहुत खास हैं और अपने आप में अलग महत्व रखती हैं। इस दौरान निभाई जाने वाली हर परंपरा दूल्हे और दुल्हन के सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती है।
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