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Vivah Muhurat 2026: जल्द सजने वाला है मंडप, कब से शुरू होगी शहनाइयों की गूंज? नोट करें विवाह मुहूर्त

Published: Sat, 31 Jan 2026 04:30 PM (IST)

सनातन धर्म में किसी भी शुभ और मांगलिक काम को करने से पहले पंचांग अवश्य देखा जाता है। विवाह के ...और पढ़ें

इस दिन से शुरू होंगी शादियां (Image Source: AI-Generated)

इस दिन से शुरू होंगी शादियां (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शादी का सीजन शुरू होने पर शहनाइयों की गूंज सुनने को मिलती है। वैसे तो हर साल 15 जनवरी से खरमास खत्म होते ही शादियों के मुहूर्त शुरू हो जाते है, लेकिन इस बार शुक्र ग्रह अस्त होने की वजह से जनवरी में कोई विवाह का शुभ मुहूर्त नहीं है।

अब 1 फरवरी को शुक्र उदय होंगे और शादियों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। अगर आपके परिवार या कोई दोस्त शादी के बंधन में बंधने वाला है, तो वैदिक पंचांग के मुताबिक, 2 फरवरी (February Vivah Muhurat 2026) से विवाह के कई शुभ बन रहे हैं, तो ऐसे आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि फरवरी से दिसंबर के शहनाइयों (Marriage Dates 2026) की गूंज कब-कब सुनाई देगी?

फरवरी विवाह मुहूर्त 2026

5,6,8,10,12,14,19, 20, 21, 24,25,26

मार्च विवाह मुहूर्त 2026

2,3,4,7,8,9,11,12

अप्रैल विवाह मुहूर्त 2026

15,20,21,25,26,27,28,29

मई विवाह मुहूर्त 2026

1,3,5,6, 7,8,13,14

जून विवाह मुहूर्त 2026

21,22,23,24,25,26,27,29

Marriage Dates 2026

 

जुलाई विवाह मुहूर्त 2026

1,6,7,11,12,

किस महीने में नहीं है विवाह मुहुर्त 

अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में विवाह का कोई भी मुहूर्त नहीं है।

नवंबर विवाह मुहूर्त 2026

21,24,25,26

दिसंबर विवाह मुहूर्त 2026

2,3,4,5,6,11,12

कब से कब तक नहीं है विवाह का कोई मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। इसी दिन से भगवान विष्णु की योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास की शुरुआत होती है। इसका समापन देवउठनी एकादशी के दिन होता है। चातुर्मास के दौरान विवाह का कोई मुहूर्त नहीं होता है। इस बार 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी है। इस दिन से फिर से शादियां शुरू होंगी।

शुक्र अस्त होने पर क्यों नहीं होती शादी?

सनातन धर्म में शादी के लिए शुक्र का उदय होना जरूरी है। इसे 'तारा डूबना' या 'शुक्र अस्त' कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु और शुक्र ग्रह को सुख-संपन्नता और मांगलिक कार्यों के कारक माने गए है। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि शुक्र के साथ गुरु का उदय होना भी जरूरी माना गया गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, विवाह के दौरान शुक्र अस्त होते है, तो पति-पत्नी को वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।