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    सूर्य ग्रहण में क्यों नहीं छूनी चाहिए भगवान की मूर्ति? जानिए सूतक काल और नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा रहस्य 

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 09:27 AM (GMT+05:30)

    सूर्य ग्रहण के दौरान भगवान की मूर्ति को छूना और मंदिरों के कपाट बंद करना नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से जुड़ा है। सूतक काल में पूजा-पाठ वर्जित होता है, ...और पढ़ें

    सूर्य ग्रहण में इन बातों का रखें ध्यान (Image Source: AI-Generated)

    सूर्य ग्रहण में इन बातों का रखें ध्यान (Image Source: AI-Generated) 

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि पर ही लगता है, क्योंकि इसी दिन चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या है। इस दिन सूर्य ग्रहण का साया रहेगा। सूर्य ग्रहण की शुरुआत से 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है। इस दौरान पूजा-पाठ और भोजन करने की मनाही है। साथ ही देवी-देवताओं की मूर्ति को छूने की मनाही है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य ग्रहण के दौरान शास्त्रों में बताए गए नियम का पालन न करने से जीवन में नकारात्मक ऊर्जा का सामना करना पड़ सकता है। सूर्य ग्रहण के समय मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि ग्रहण में देवी-देवताओं की मूर्ति को छूने की क्यों मनाही है और मंदिर के कपाट क्यों बंद कर दिए जाते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह के बारे में।

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    (Image Source: AI-Generated) 

    ग्रहण में देवी-देवताओं की मूर्ति को छूना वर्जित क्यों है?

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य ग्रहण के दौरान पृथ्वी पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक बढ़ जाता है और सूर्य की किरणें पृथ्वी तक सीधे नहीं पहुंच पातीं। इसलिए सूर्य ग्रहण के दौरान देवी-देवताओं की मूर्ति को छूने से मना किया जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मंदिर में विराजमान मूर्तियों में दिव्य ऊर्जा का वास होता है। इसलिए नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव के दौरान देवी-देवताओं की मूर्ति को छूने से मना किया जाता है। ग्रहण से पहले सूतक काल लगता है। इस दौरान पूजा-पाठ और देवी-देवताओं की मूर्ति को छूना वर्जित है।

    मंदिर के कपाट रहते हैं बंद

    सूतक काल के दौरान में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है, क्योंकि सूर्य ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव भगवान की ऊर्जा और पवित्रता पर न पड़े। सूर्य ग्रहण का समापन होने के बाद स्नान करने के बाद घर और मंदिर की साफ-सफाई करनी चाहिए। इसके बाद गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करना चाहिए। साथ ही विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करें और मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए।

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    भारतीय समय के अनुसार, 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण की शुरुआत रात 09 बजकर 04 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 13 अगस्त की सुबह 04 बजकर 25 मिनट पर होगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, जिसकी वजह से इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।