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सूर्य देव और बाली के बीच क्या था असली रिश्ता? यहां पढ़ें रामायण का अनसुना रहस्य

Published: Sun, 30 Aug 2026 01:20 PM (IST)

बाली रामायण का एक शक्तिशाली वानरराज था, जिसे युद्ध में विरोधी की आधी शक्ति प्राप्त करने का वरदान मिला था। ...और पढ़ें

कैसे हुआ बाली का जन्म? (Picture Credit: AI Generated)

कैसे हुआ बाली का जन्म? (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. बाली को युद्ध में विरोधी की आधी शक्ति मिलती थी।

  2. सूर्य देव बाली के भाई सुग्रीव के पिता थे।

  3. बाली का जन्म इंद्र के तेज से एक स्त्री के बालों से हुआ।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ रामायण है। इस ग्रंथ में कई ऐसे पात्र हैं, जिनका जीवन कई रहस्यों से भरा हुआ है। इन्हीं में से एक है बाली। बाली रामायण का एक अधिक शक्तिशाली पात्र था। वह किष्किंधा का वानरराज और सुग्रीव का भाई था।

जब भी बाली का नाम सामने आता है, तो उसके अद्भुत बल, युद्ध कौशल और उस विशेष वरदान की चर्चा होती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बाली को एक ऐसा वरदान मिला हुआ था, जिसकी वजह से युद्ध के समय उसके सामने जो भी आता, उसकी आधी शक्ति बाली के शरीर में समा जाती थी। बाली ने दुंदुभि दानव का वध किया था।

रामायण में बाली का संबंध ग्रहों के राजा सूर्य देव से भी बताया गया है। अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि बाली का सूर्य देव से क्या कनेक्शन है? आइए इस आर्टिकल में हम आपको इसके बारे में बताते हैं।

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(Picture Credit: AI Generated)

पौराणिक कथा के अनुसार, बाली किष्किंधा का वानर राजा था। वह अत्यंत पराक्रमी था, जिसकी वजह से उसे महाबली के नाम से भी जाना जाता था। जब लंकापति रावण ने माता सीता का अपहरण किया, तो वह उन्हें लंका ले गया। वहीं, भगवान श्रीराम और लक्ष्मण माता सीता की खोज में जंगल में भटक रहे थे। इसी दौरान प्रभु की मुलाकात संकटमोचन हनुमान जी से हुई। हनुमान जी ने ही श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता कराई थी।

बाली ने अपने बल के अहंकार में सुग्रीव को राज्य से निष्कासित कर दिया था और उसकी पत्नी को भी छीन लिया था। इसके बाद श्रीराम ने सुग्रीव को उसका अधिकार और सम्मान वापस दिलाने के लिए बाली से युद्ध कर उसका वध किया।

रामायण में बताया गया है कि बाली और सूर्य देव के बीच पिता-पुत्र का संबंध नहीं था, बल्कि सूर्य देव बाली के भाई सुग्रीव के पिता थे। इस प्रकार बाली (इंद्र के अंश) और सुग्रीव (सूर्य के अंश) दोनों एक ही माता के पुत्र थे।

कैसे हुआ बाली का जन्म?

पौराणिक कथा के अनुसार, ऋक्षराज नाम का एक वानर था। उसने एक जादुई सरोवर में स्नान किया, जिससे वह एक अत्यंत सुंदर स्त्री में बदल गया। उसके रूप को देखकर देवराज इंद्र मोहित हो गए और उनका तेज उस स्त्री के बालों पर गिरा। बालों से उत्पन्न होने की वजह से ही इस पराक्रमी वानर का नाम 'बाली पड़ा। बाली की इस कथा का वर्णन रामायण के किष्किंधाकाण्ड में अध्याय 5 से लेकर अध्याय 26 तक मिलता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।