शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए जल में मिलाएं ये 5 चीजें, मिलेगा सुख-समृद्धि और शांति का वरदान
शरद पूर्णिमा पर चंद्रदेव को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है। जानें चंद्रमा को अर्घ्य देने की सही विधि, ...और पढ़ें

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ दिखाई देता है और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इस दिन चंद्रदेव को अर्घ्य देना भी शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि अर्घ्य के जल में कुछ विशेष चीजें मिलाकर चंद्रमा को अर्पित करने से पूजा का महत्व बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य देते समय जल में कौन सी 5 चीजें मिलानी चाहिए और इनका क्या धार्मिक महत्व है।
कच्चा दूध
शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए जल में थोड़ा-सा कच्चा दूध मिलाया जा सकता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में दूध को शुद्धता, शीतलता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष में भी दूध का संबंध चंद्रमा से बताया गया है। मान्यता है कि चंद्रदेव को दूध मिश्रित जल अर्पित करने से मानसिक शांति और सकारात्मकता की कामना पूरी होती है।
शहद
शहद को मिठास, प्रेम और मधुर संबंधों का प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान शहद का उपयोग शुभ माना जाता है। शरद पूर्णिमा पर अर्घ्य के जल में थोड़ी मात्रा में शहद मिलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे जीवन में मधुरता और परिवार में प्रेम बना रहता है।
साबुत चावल
अक्षत का अर्थ है ऐसे साबुत चावल, जो टूटे हुए न हों। इन्हें पूर्णता, मंगल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रदेव की पूजा करते समय अक्षत अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
सफेद फूल
सफेद रंग को शांति, पवित्रता और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए चंद्रदेव की पूजा में सफेद फूलों का विशेष महत्व बताया जाता है। शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य देते समय सफेद फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे मन में शांति और जीवन में सकारात्मकता की कामना की जाती है। आप अपनी उपलब्धता के अनुसार सफेद फूल चुन सकते हैं और उन्हें श्रद्धापूर्वक पूजा में अर्पित कर सकते हैं।
मिश्री या चीनी
मिश्री और चीनी मिठास का प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन्हें शुभता और मधुरता से जोड़ा जाता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रदेव को अर्घ्य देते समय कुछ लोग जल में थोड़ी मिश्री मिलाते हैं या पूजा में अलग से मिश्री अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इससे जीवन में सुख, शांति और पारिवारिक सौहार्द बना रहता है।
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