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शरद पूर्णिमा से तुलसी विवाह तक: जानिए क्यों श्रीकृष्ण को बेहद प्रिय है कार्तिक का महीना और क्या है दीपदान का रहस्य?

Published: Fri, 23 Oct 2026 11:30 AM (IST)

कार्तिक मास, (Kartik Maas 2026) जिसे दामोदर का महीना भी कहते हैं, भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र ...और पढ़ें

कार्तिक दामोदर मास 2026

कार्तिक दामोदर मास 2026

HighLights

  1. भगवान श्रीकृष्ण के लिए अत्यंत पवित्र महीना दामोदर मास।

  2. पूजा-उपासना से मिलता है 1000 गुना अधिक आशीर्वाद।

  3. दीपदान और कई महत्वपूर्ण त्योहारों का संगम है यह मास।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कार्तिक, जिसे दामोदर का महीना भी कहा जाता है, भगवान श्रीकृष्ण के लिए अपने प्यार को और भी ज्यादा गहरा करने का महीना है। कृष्ण भक्त इसे साल का अत्यंत पवित्र महीना मानते हैं। माना जाता है कि इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-उपासना और नाम जप करने से साल के किसी भी दूसरे समय की तुलना में 1000 गुना ज्यादा आशीर्वाद मिलता है।

कार्तिक दामोदर महीना (Kartik Damodar Maas 2026 Kab hai) इस साल 25 अक्टूबर से शुरू होकर 24 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। इस महीने में भक्त भगवान से अधिक मन्नतें मांगते हैं, धार्मिक कार्य करते हैं। इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा उनके बाल्यकाल दामोदर के रूप में करते हैं, जिन्हें उनकी मां यशोदा ने बचपन की शरारतों की सजा के तौर पर कमर से बांध दिया था।

कार्तिक दामोदर महीने का महत्व

हिंदू धर्म में कार्तिक दामोदर महीने का महत्व इसलिए इतना अधिक है, क्योंकि इस मास में भगवान ने काफी सारी लीलाएं की हैं, जो कुछ इस तरह हैं-

शरद पूर्णिमा- इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राधारानी और गोपियों के साथ रास किया था। शरद पूर्णिमा की रात से ही कार्तिक मास की शुरुआत हो जाती है।

बहुलाष्टमी- इस दिन राधाकुंड के आविर्भाव का स्मरणोत्सव है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी ने श्यामकुंड और राधा कुंड का निर्माण किया था।

रमा एकादशी- कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाए जाने वाली एकादशी रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है। भगवान विष्णु की पत्नी मां लक्ष्मी का एक नाम रमा भी है, इसलिए इस एकादशी को रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु पूर्णावतार केशव स्वरूप की भी पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन व्रत रखने से जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती है।

धनतेरस- इस दिन भगवान धनवंतरी अमृत और आयुर्वेद से जुड़ी औषधि लेकर प्रकट हुए थे।

नरका चतुर्दशी- इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था।

दामोदर लीला- इसी पवित्र मास में दिवाली के दिन मां यशोदा ने भगवान कृष्ण को उखल से बांध दिया था, जिसके बाद उनका नाम दामोदर पड़ा।

दिवाली- दामोदर मास में ही भगवान श्रीराम 14 साल के वनवास से अयोध्या वापस लौटे थे। सभी अयोध्यावासियों ने इस दिन दिए जलाये थे।

गोवर्धन पूजा- दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा की जाती है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बाएं हाथ की कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाया था। इस दिन भगवान को 56 भोग लगाए जाते हैं।

गोपाष्टमी- इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गाय चराना शुरू किया।

देवउठनी एकादशी- इस दिन 4 महीने के लंबे समय के बाद भगवान विष्णु योग निद्रा से उठते हैं। इसलिए इस एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है।

तुलसी विवाह- इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और तुलसी देवी का विवाह कराया जाता है।

कार्तिक दामोदर मास में दीपदान करने का भी खास महत्व है। इस पूरे महीने समय पर अपने घर के ठाकुर जी के आगे एक दीपक जरूर जलाना चाहिए। कार्तिक मास में दीप अर्पण करने से भगवान कृष्ण अत्यंत प्रसन्न होते हैं। श्रीकृष्ण ऐसे व्यक्ति का गुणगान भी करते हैं, जो दीपदान श्री यमुना जी में करता या करवाता है अपने नाम या गोत्र से।

इसके अलावा कार्तिक दामोदर मास को लेकर स्कंदपुराण में कहा गया है कि,

'मासानां कार्तिकः श्रेष्ठो देवानां मधुसूदनः।
तीर्थ नारायणाख्यं हि त्रितयं दुर्लभं कलौ।'

यानी-भगवान विष्णु और विष्णु तीर्थ के समान ही कार्तिक का महीना श्रेष्ठ और दुर्लभ है।

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