जिस मिट्टी से बनाते हैं शिवलिंग, उसे उठाने का भी है नियम! पूजा के बाद शिव-गौरी का विसर्जन कैसे करें?
सावन में पार्थिव शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। जानें शिवलिंग के लिए मिट्टी कहां से लें, इसे कैसे बनाएं, पूजा विधि और विसर्जन के नियम।

शिवलिंग का कैसे करें विसर्जन? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए बेहद खास माना जाता है। इस महीने में भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार महादेव की पूजा करते हैं। शिव पुराण में भी मिट्टी से बने पार्थिव शिवलिंग की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों में पार्थिव लिंग को कल्याण, सुख और मनोकामना पूर्ति से जोड़कर बताया गया है। हालांकि, इससे जुड़े फल धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा हैं।
पार्थिव शिवलिंग के लिए कैसी मिट्टी लें?
पार्थिव शिवलिंग बनाने में सबसे पहले मिट्टी की शुद्धता का ध्यान रखा जाता है। शिव पुराण में मिट्टी से बनी प्रतिमा के लिए नदी, झील या कुएं के पास की मिट्टी लेने का उल्लेख मिलता है। मिट्टी साफ होनी चाहिए और उसमें कंकड़, तिनके या दूसरी गंदगी नहीं होनी चाहिए।
मिट्टी को साफ करके उसमें जरूरत के अनुसार जल मिलाकर अच्छी तरह गूंथ लें। परंपरा में गंगाजल और दूध का इस्तेमाल भी किया जाता है। इसके बाद साफ स्थान पर बैठकर श्रद्धा से शिवलिंग का आकार दें। पार्थिव लिंग को एक ही मिट्टी के हिस्से से बनाना शुभ माना गया है।
पूजा में क्या चढ़ाएं?
शिवलिंग तैयार होने के बाद सबसे पहले जल से अभिषेक करें। इसके बाद दूध, चंदन, अक्षत, सफेद फूल और बेलपत्र अर्पित किए जा सकते हैं। धतूरा और शमी पत्र भी शिव पूजा में चढ़ाने की परंपरा है। पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' का जप करें और अंत में आरती करके भगवान शिव से अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगें।
पूजा के बाद क्या करें?
पार्थिव शिवलिंग स्थायी प्रतिमा नहीं माना जाता, इसलिए पूजा पूरी होने के बाद उसके विसर्जन की परंपरा है। घर में विसर्जन करना हो तो साफ बड़े पात्र में पानी लेकर उसमें शिवलिंग को धीरे से प्रवाहित किया जा सकता है। मिट्टी घुल जाने के बाद उस जल को किसी पौधे या गमले में डालना बेहतर माना जाता है। नदी या तालाब में विसर्जन करते समय स्थानीय नियमों और स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए।
इन बातों का रखें ध्यान
शिवलिंग बनाते और पूजा करते समय स्थान साफ रखें। पूजा सामग्री श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार रखें; किसी एक सामग्री को लेकर अनावश्यक चिंता न करें। सबसे जरूरी बात भक्ति और मन की शुद्धता है। पार्थिव शिवलिंग की पूजा से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में नियमों और परंपराओं में अंतर भी मिल सकता है, इसलिए स्थानीय परंपरा या परिवार की पूजा-पद्धति का सम्मान करें। इस पूजा में दिखावे से ज्यादा श्रद्धा को महत्व दिया जाता है।
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