Sankashti Chaturthi 2026: बिना इस कथा के अधूरा है द्विजप्रिय चतुर्थी का व्रत, जानें गणेश जी के इस स्वरूप का रहस्य
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi 2026 Katha) पर भगवान गणेश की पूजा और व्रत कथा का महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, व्रत कथा के ...और पढ़ें

Sankashti Chaturthi 2026: द्विजप्रिय चतुर्थी व्रत कथा। (Ai Generated)
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हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश को विघ्नहर्ता माना गया है
यह दिन भगवान गणेश को समर्पित है
इस दिन व्रत रखने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश को विघ्नहर्ता माना गया है। फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाने वाली द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत आज रखा जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता, जब तक कि भगवान गणेश की व्रत कथा का पाठ न किया जाए। ऐसी मान्यता है कि इस दिव्य कथा के पाठ से जीवन में आने वाली बड़ी से बड़ी बाधाएं दूर हो जाती हैं और भगवान गणेश की कृपा मिलती है।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा (Sankashti Chaturthi 2026 Katha)
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एक बार देवताओं पर भारी संकट आ पड़ा। राक्षसों से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव के पास गए और अपनी रक्षा की गुहार लगाई। महादेव ने अपने दोनों पुत्रों, कार्तिकेय और गणेश को बुलाया और पूछा कि तुम दोनों में से कौन देवताओं के कष्टों का अंत कर सकता है? दोनों भाइयों ने खुद को सक्षम बताया। तब महादेव ने एक परीक्षा रखी और कहा - 'जो सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके वापस आएगा, वही देवताओं का सेनापति बनेगा और विघ्नहर्ता कहलाएगा।' कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल गए। लेकिन गणेश जी का वाहन मूषक (चूहा) था, जिससे पृथ्वी की परिक्रमा करना कठिन था। तब गणेश जी ने अपनी तेज बुद्धि का प्रयोग किया। वे उठे और अपने माता-पिता के चारों ओर सात बार परिक्रमा की और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। जब महादेव ने इसका कारण पूछा, तो गणेश जी ने उत्तर दिया - 'माता-पिता के चरणों में ही पूरा ब्रह्मांड और पृथ्वी का वास है। उनकी परिक्रमा करना पृथ्वी की परिक्रमा करने के समान है।' उनकी इस चतुराई और भक्ति को देखकर शिव जी बहुत खुश हुए और उन्हें विघ्नहर्ता होने का वरदान दिया।
एक अन्य कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु का विवाह लक्ष्मी जी के साथ हो रहा था, तब सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया लेकिन गणेश जी को नहीं बुलाया गया। जब बप्पा को यह पता चला, तो उन्होंने अपने चूहों की सेना को भेजकर रास्ता खुदवा दिया, जिससे देवताओं के रथ के पहिए फंस गए। अंत में देवताओं को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने गणेश जी की स्तुति की। गणेश जी के आशीर्वाद से ही विवाह निर्विघ्न पूर्ण हुआ।
कथा पाठ के लाभ
- घर के वास्तु दोष और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- बच्चों की बुद्धि और एकाग्रता में वृद्धि होती है।
- पैसों से जुड़ी मुश्किलें दूर होती हैं।
पूजा के बाद क्या करें?
कथा पूरी होने के बाद गणेश जी की आरती करें और रात में चंद्रोदय के समय चंद्रमा को जल, अक्षत और सफेद फूल से अर्घ्य दें। इसके बाद ही अपना व्रत खोलें।
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