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    'राम नाम जपते...': श्रीरामचरितमानस की वह अनोखी चौपाई, जिससे चुटकियों में याद होंगे सभी राज्यों के नाम

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 11:24 AM (IST)

    रामचरितमानस की एक चौपाई  जिसमें भारतीय राज्यों के नाम छिपे होने का दावा किया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि यह गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचि ...और पढ़ें

    श्रीरामचरितमानस की इस चौपाई में छिपा है भारत के राज्यों के नाम (Picture Credits- AI Image)

    श्रीरामचरितमानस की इस चौपाई में छिपा है भारत के राज्यों के नाम (Picture Credits- AI Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। यह बात सुनने में हैरान करने के साथ काफी अजीब भी लग सकती है कि, भारत के राज्यों के नाम रामचरितमानस की एक खास चौपाई में समाई है। चौकिए मत गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामरितमानस की चौपाइयां सिर्फ छंद मात्र नहीं है, बल्कि जीवन के प्रति नैतिक मूल्य, अध्यात्म और ईश्वर की भक्ति का मुख्य आधार भी माना जाता है।

    भारत में रहने वाले अधिकतर लोगों सभी राज्यों के नाम जानते होंगे। वैसे जिन लोगों को भारत के संपूर्ण राज्यों का नाम पता नहीं है, उन्हें रामचरितमानस की इस चौपाई को पढ़ने और समझने के बाद सभी राज्यों के नाम याद हो जाएंगे।

    श्रीरामचरित मानस की यह चौपाई है-

    राम नाम जपते, अत्रि मत गुसिआउ।
    पंक में उगोहिमि अहि के छबि झाउ।।

    अर्थात्- भगवान श्रीराम का नाम जप करते हुए कभी भी गुस्सा नहीं करना चाहिए। अत्रि ऋषि के मुताबिक संसार रूपी कीचड़ में रहकर भी राम भगवान का भक्त कमल के फूल की भांति रहता है और सांप के सिर पर छाया देने वाले झाऊ के पेड़ के जैसे ईश्वर की शरण में सुरक्षित रहता है।

    राम नाम जपते, अत्रि मत गुसिआउ।
    पंक में उगोहिमि अहि के छबि झाउ।।

    रा- राजस्थान
    म- महाराष्ट्र
    ना- नागलैंड
    ज- जम्मू कश्मीर
    प- पश्चिम बंगाल
    ते- तेलंगाना
    अ- असम
    त्रि- त्रिपुरा
    म- मध्य प्रदेश
    त- तमिलनाडु
    गु- गुजरात
    सि- सिक्किम
    आ- आंध्र प्रदेश
    उ- उत्तर प्रदेश
    पं- पंजाब
    क- कर्नाटक
    मे- मेघालय
    उ- उत्तराखंड
    अ- अरुणाचल प्रदेश
    हि- हिमाचल प्रदेश
    के- केरल
    छ- छत्तीसगढ़
    झा- झारखंड
    गो- गोवा
    ह- हरियाणा
    मि- मिजोरम
    बि- बिहार
    उ- उड़ीसा

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    स्वामी तुलसीदास जी ने संस्कृत में लिखी रामायण को अवधी भाषा में लिखकर समाज के प्रत्येक वर्ग तक इसके नैतिक मूल्यों और आदर्शों को पहुंचाने का काम किया है।

    चौपाई में राज्य के नामों का छिपा होना महज एक संयोग से बढ़कर कुछ भी नहीं है, क्योंकि इस तरह का वर्णन किसी भी धार्मिक ग्रंथ और पुराण में देखने को नहीं मिलता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।