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'मेरा गुस्सा बहुत बुरा है', अगर आप भी इसे अपनी ताकत मानते हैं; तो रामचरितमानस की यह चौपाई बदल देगी आपकी सोच

Published: Thu, 16 Jul 2026 12:18 PM (IST)

गुस्सा मानवीय स्वभाव का हिस्सा है, लेकिन हिंदू धर्म के अनुसार यह पापों का मूल और स्वयं का नुकसान करता ...और पढ़ें

गुस्सा करना खराब आदत है (Picture Credits- AI Image)

गुस्सा करना खराब आदत है (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गुस्सा आना इंसानी स्वभाव का अहम हिस्सा है। क्रोध कभी भी ताकत की निशानी नहीं होती है। जब कोई कहता है कि, मेरा गुस्सा काफी बुरा है या कई बार हमें सुनने को मिलता है कि, इस आदमी को काफी गुस्सा आता है, यह कोई अच्छी बात नहीं है। हिंदू धर्म के अनुसार, जो व्यक्ति अधिक क्रोध करता है, वह दूसरों का नहीं बल्कि खुद का नुकसान करता है।

गुस्से की शुरुआत कठोर शब्दों से होती है, क्योंकि शब्द हमारे सबसे बड़े हथियार हैं। अधिक गुस्सा करने से व्यक्ति को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है, इस बात को रामचरितमानस की इस चौपाई से आसानी से समझा जा सकता है।

राजा जनक के दरबार से जुड़ी घटना

जब राजा जनक के दरबार में भगवान श्रीराम ने शिवजी का धनुष तोड़ा तो, परशुराम इस बात पर काफी गुस्सा हो गए। उनके क्रोधी रूप को देखकर सभा में मौजूद सभी लोग कांप रहे थे। तभी लक्ष्मण जी ने हंसते हुए कहा कि,

लखन कहेउ हँसि सुनहु मुनि क्रोधु पाप कर मूल ।

जेहि बस जन अनुचित करहिं चरहिं बिस्व प्रतिकूल ॥

अर्थात्-लक्ष्मण जी ने सभा में हंसकर कहा कि, हे मुनि! सुनिए, गुस्सा पाप का मूल है, जिसके वश में होकर व्यक्ति अनुचित कार्य कर बैठते हैं और विश्वभर के प्रतिकूल चलते हैं। (रामचरितमानस 277)

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गुस्सा सभी मूल पापों का कारण है

इस चौपाई में क्रोध के बारे में बात की गई है कि, गुस्सा ही सभी पापों का मूल कारण हैं। कभी सोचा है कि, आखिर हमें गुस्सा आता ही क्यों हैं? भगवान कृष्ण गीता में इसका जवाब देते हैं कि, विषयों के प्रति आसक्ति से कामना पैदा होती है तथा कामना के पूरे होने पर गुस्सा आता है। कोध्र हमारी बुद्धि का नाश कर देता है। जो मनुष्य बुद्धि व विवेक का इस्तेमाल नहीं करता है, उसका पतन होना निश्चित है।

अलग-अलग रचनाओं में गुस्से को कृसानु (आग) का नाम दिया गया है, जो व्यक्ति के बुद्धि रूपी ईंधन को खर्च कर पूरे शरीर को ही जला देती है। गुस्सा भ्रम पैदा करता है।

गुस्सा एक अंधापन है। जब किसी व्यक्ति को गुस्सा आता है, तो सबसे पहले उसकी ही सोचने-समझने की क्षमता मर जाती है। जिसके कारण प्यार, रिश्ता और भरोसा एक ही पल में मर जाता है, जिसे बनाने में आपकी सालों की मेहनत होती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।