यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 12, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
होमकुंड को पार करनी होगी दलदल
शिलासमुद्र से आगे होमकुंड व यात्रा विपर्जन के बाद वापस चंदनियाघाट का सफर यात्रियों के लिए मुश्किल भरा है। दलदल वाले रास्ते से यात्रियों को गुजरना पड़ेग ...और पढ़ें

रुद्रप्रयाग, [बृजेश भट्ट]। शिलासमुद्र से आगे होमकुंड व यात्रा विपर्जन के बाद वापस चंदनियाघाट का सफर यात्रियों के लिए मुश्किल भरा है। दलदल वाले रास्ते से यात्रियों को गुजरना पड़ेगा। तैयारियों की बात करें तो यहां प्रशासन की ओर से यात्रा की कोई भी तैयारियां दिखाई नहीं देती।
राजजात का विसर्जन व वापस चंदनियाघाट की देव यात्रा भक्तों के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखती है। शिलासमुद्र से अगले पड़ाव तक का सफर थकान भरा होने के साथ ही काफी कठिन है। तीन किमी से अधिक मार्ग दलदल है, जिसमें दो से तीन फीट तक पांव डूब सकते हैं। ऐसे में संभलकर ही भक्तों को यात्रा करनी होगी। चंदनियाघाट का गदेरा ऊफान पर है ऐसे में यदि पानी और बढ़ा तो यह यात्रा में रुकावट डाल सकता है। फिलहाल यहां कच्चा पुल तो बना है, लेकिन पानी बढ़ने की स्थिति में गदेरा पार करने के लिए किसी तरह के सरकारी स्तर पर इंतजाम नहीं है। पूरे यात्रा मार्ग पर कुछ स्थानों पर वन विभाग की एक-दो हट बनी हैं, इसके अलावा न रास्ता बना है न ही कोई अन्य सुविधा है।
अभी तक नहीं है व्यवस्था
* चंदनियाघाट में नहीं बने हट
* पैदल मार्ग खतरनाक व जर्जर
यह होनी है व्यवस्था
* लगभग एक से दो हजार तीर्थयात्रियों के लिए रहने के लिए 100 टेंटों या हट की व्यवस्था
* दलदल वाले मार्ग को ठीक करना
* रास्ते में पड़ने वाले गदेरों में अस्थाई पुल का निर्माण
* यात्रियों के लिए रहने व खाने का इंतजाम