अभिमन्यु की मौत का बदला और श्रीकृष्ण की माया: पढ़ें ग्रहणकाल से जुड़ी महाभारत की सबसे रोचक कथा
भारत में जब-जब ग्रहण की चर्चा होती है महाभारत से जुड़ी एक लोकप्रिय कथा काफी सुनी-सुनाई जाती है। क्या है यह पौराणिक कथा आइए जानते हैं? ...और पढ़ें

ग्रहण काल से जुड़ी महाभारत की ये कथा

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। साल 2026 में दो चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण लगने वाले हैं। जिसमें पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को लगा था और पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगा था। जिसके बाद अब साल का आखिरी सूर्य और चंद्र ग्रहण अगस्त महीने में लगने जा रहा है। ग्रहण काल से जुड़ी कई कहानियां और मान्यताएं प्रचलित हैं, जिसमें एक पौराणिक कथा महाभारत काल से भी जुड़ी है।
आसमान में जब ग्रहण लगता है, तो चारों और अंधकार पसर जाता है और एक अजीब सा-सन्नाटा देखने को मिलता है और कुछ ऐसा ही नजारा महाभारत के युद्ध में बना था, जब अचानक से अंधेरा पसर गया और सबको लगा कि, सूर्यास्त हो चुका है लेकिन वो केवल अंधेरा नहीं था, बल्कि भगवान की रची माया थी जिसने महाभारत का इतिहास बदल दिया। आइए जानते हैं आखिर उस शाम क्या हुआ था, जिसने अर्जुन की प्रतिज्ञा पूरी करने में मदद की।
साल का आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026, बुधवार के दिन लगने जा रहा है और वहीं चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगेगा। भले ही दोनों ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देंगे, लेकिन जब-जब भारत में ग्रहण लगता है, अक्सर लोगों के बीच महाभारत से जुड़ी एक कथा प्रसांगिक हो जाती है।

महाभारत में ग्रहण से जुड़ी कथा
महाभारत युद्ध में द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह रचा। अर्जुन के अलावा सिर्फ अभिमन्यु को ही उसमें प्रवेश करने का ज्ञान था, लेकिन बाहर निकलने का तरीका उन्हें भी नहीं पता था। जयद्रथ ने पांडवों को चक्रव्यूह में प्रवेश करने से रोक दिया और सात महारथियों ने मिलकर अर्जुन पुत्र अभिमन्यु का वध कर दिया। पुत्र की मौत ने अर्जुन को काफी आहत किया और प्राण लिया कि अगले दिन सूर्यास्त से पहले अगर जयद्रथ का वध नहीं किया तो अग्नि समाधि ले लेंगे।
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अगले दिन जयद्रथ की सुरक्षा के लिए संपूर्ण कौरव सेना खड़ी थी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी माया से सूर्य को ढक दिया जिसके कारण युद्ध भूमि पर अंधेरा छा गया। जयद्रथ बाहर आया तभी सूर्य एक बार फिर से प्रकाशमान हो गया। उसी क्षण अर्जुन ने अपने धनुष बाण से जयद्रथ का वध कर दिया।
जब-जब चंद्र ग्रहण या सूर्य ग्रहण की चर्चा होती है, अक्सर लोग महाभारत से जुड़ी इस कथा को सुनते-सुनाते नजर आ जाते हैं। सदियों पुरानी यह पौराणिक घटना आज के समय में भी काफी प्रचलित है।
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