Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    गले में क्यों पहनी जाती है तुलसी की माला, कलाई पर क्यों नहीं? जानें धार्मिक कारण

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 09:30 AM (IST)

    तुलसी की माला को हाथ में पहनने या गले में धारण करने को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं। वैष्णव परंपराओं के अनुसार, इसे गले में पहनना अधिक पवित्र और सम्मानजनक ...और पढ़ें

    गले में तुलसी की माला धारण करने के नियम (Picture Credits- AI Image)

    गले में तुलसी की माला धारण करने के नियम (Picture Credits- AI Image)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में तुलसी का पौधा अत्यंत पवित्र और पूजनीय पौधों में शामिल है। ऐसा माना जाता है कि, यह भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है। इसी वजह से कई भक्त श्रद्धा और भक्ति के रूप में तुलसी की माला धारण करते हैं। अधिकतर लोग तुलसी की माला को गले में पहनना पसंद करते हैं, लेकिन कुछ लोगों का यह सवाल भी रहता है कि, क्या इसे हाथ में पहना जा सकता है?

    इस सवाल का जवाब आपके द्वारा मानी जाने वाली परंपरा पर निर्भर करता है। अनेक वैष्णव परंपराओं में तुलसी की माला को गले में पहनने का विधान है। ये सिर्फ एक रिवाज नहीं है, बल्कि पवित्र मानी जाने वाली वस्तु के प्रति सम्मान जाहिर करने का एक तरीका है।

    तुलसी की माला आभूषण से कहीं ज्यादा

    तुलसी की माला सिर्फ फैशन के लिए नहीं पहनी जाती है। यह एक पवित्र वस्तु है, जो ईश्वर के समीप रहने की याद दिलाती है। कई लोग इसे आस्था के साथ रोजाना इसे धारण करते हैं। कई मंदिरों और आध्यात्मिक परंपराओं में आध्यात्मिक मार्ग अपनाने के बाद ही तुलसी की माला भेंट की जाती है। इसलिए इसका बड़ी सावधानी और सम्मान के साथ ध्यान रखा जाता है।

    गर्दन में पहनने की परंपरा क्यों?

    कई वैष्णव गुरुओं के मुताबिक, तुलसी की माला को गले में धारण करना सही माना जाता है। इसे गर्दन में धारण करना ईश्वर के प्रति सम्मान का प्रतीक है जो व्यक्ति को सरल और पवित्र जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है। ऐसा माना जाता है कि, तुलसी की माला आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करती है। इसका शरीर के निकट रहना भक्ति का प्रतीक है, न कि सजावट का।

    खबरें और भी

    कलाई पर पहनने से क्यों बचना चाहिए?

    हमारे हाथ लगातार व्यस्त रहते हैं। हम खाना बनाते, सफाई करते, यात्रा करते और कई दैनिक कार्यों में इनका इस्तेमाल करते हैं। पूजा के दौरान ये उन चीजों के संपर्क में भी आ सकते हैं, जिन्हें हम अशुद्ध मानते हैं।

    तुलसी की माला पवित्र होने की वजह से कई लोग इसे कलाई पर पहनना सही नहीं मानते हैं। इसे गले में पहनना अधिक सम्मानजनक तरीका है। यह मान्यता कई धार्मिक परिवारों और आध्यात्मिक गुरुओं से पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।

    यह भी पढ़ें- इन लोगों को नहीं पहननी चाहिए तुलसी माला, वरना झेलना पड़ेगा दुर्भाग्य!

    यह भी पढ़ें- Tulsi Mala Ke Niyam: आप भी पहन रहे हैं तुलसी माला, तो इन बातों का रखें ध्यान, मिलेगा शुभ फल

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।