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कद्दू में दीपक जलाने की ये साधना क्यों मानी जाती है खास? कुष्मांडा दीपम का धार्मिक महत्व यहां पढ़ें

Published: Tue, 18 Aug 2026 12:49 PM (IST)Updated: Tue, 18 Aug 2026 12:51 PM (IST)

कुष्मांडा दीपम यानी सफेद कद्दू में दीपक जलाने की परंपरा को नकारात्मकता दूर करने और सुख-समृद्धि के लिए खास माना जाता है। जानिए इसका धार्मिक महत्व और पूजा विधि।

कुष्मांडा दीपम क्या है? (AI-generated Image)

कुष्मांडा दीपम क्या है? (AI-generated Image)

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संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में दीपक जलाने की परंपरा बहुत पुरानी है। आमतौर पर आप अपने घर के मंदिर में मिट्टी या किसी धातु का दीपक जलाते होंगे। लेकिन, क्या आपने कभी कद्दू के अंदर दीपक जलाने के बारे में सुना है? इसे कुष्मांडा दीपम कहा जाता है। इसमें सफेद कद्दू यानी पेठे वाले कद्दू को बीच से काटकर उसके अंदर दीपक जलाने की परंपरा है।

धार्मिक मान्यताओं में इस दीपक को नकारात्मकता दूर करने, बाधाओं से मुक्ति और घर में सकारात्मक माहौल बनाने से जोड़ा जाता है। वहीं, कुछ परंपराओं में इसे काल भैरव बाबा और मां कुष्मांडा की आराधना से भी जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इससे जुड़े लाभ धार्मिक मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित दावे नहीं।

क्यों जलाया जाता है कुष्मांडा दीपम?

मान्यता है कि कुष्मांडा दीपम जलाने से घर और आसपास की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। कई लोग इसे नजर दोष, अनिष्ट प्रभाव और परेशानियों से बचाव के लिए धार्मिक उपाय के तौर पर करते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे ग्रह संबंधी परेशानियों और वास्तु दोष के निवारण से भी जोड़ा जाता है।

कुछ भक्त इस साधना को आर्थिक परेशानियों से राहत और समृद्धि की कामना के लिए भी करते हैं। खासकर, कालाष्टमी या अमावस्या जैसे अवसरों पर इसे करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में देखने को मिलती है।

कैसे तैयार किया जाता है यह दीपक?

इस दीपक को तैयार करने के लिए एक साफ और नया सफेद कद्दू लिया जाता है। इसे बीच से काटकर अंदर का गूदा और सारे बीज निकाल दिए जाते हैं, ताकि यह दीपक रखने के लिए पात्र जैसा बन जाए। इसके बाद कद्दू पर हल्दी और कुमकुम लगाया जाता है। इसमें तिल का तेल या घी डालकर रूई की बाती रखी जाती है और फिर दीपक जलाया जाता है।

पूजा के दौरान भगवान काल भैरव का स्मरण और प्रार्थना की जाती है। काल भैरव की उपासना में कालभैरवाष्टकम के पाठ करने का भी विधान है। शिवरहस्य में कालाष्टमी की पूजा के संदर्भ में कालभैरवाष्टकम का उल्लेख मिलता है।

कुष्मांडा दीपम से क्या है कालाष्टमी का कनेक्शन?

हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मासिक कालाष्टमी के रूप में माना जाता है और इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा की जाती है। इसलिए, कई भक्त इस अवसर पर विशेष दीपक जलाकर भगवान से भय, बाधाओं और परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।