जन्माष्टमी 2026 के शुभ अवसर पर घर में लाएं कृष्ण जी की ये 5 प्रिय वस्तुएं
कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी, जिस दिन भक्त भगवान कृष्ण से जुड़ी पांच शुभ वस्तुएं घर लाते हैं।

भगवान कृष्ण से जुड़ी 5 प्रिय वस्तुएं (Picture Credits- AI Images)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस साल 4 सितंबर 2026, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन भक्त उपवास, भजन-कीर्तन, आधी रात को कृष्ण जन्मोत्सव की पूजा और खास भोग के साथ इस त्योहार को मनाते हैं।
कई परिवार इस मौके पर भगवान कृष्ण से जुड़ी वस्तुएं भी अपने घरों में लाते हैं। मोर पंख से लेकर तुलसी और लड्डू गोपाल तक हर कृष्ण भक्त के लिए यह वस्तुएं बेहद खास महत्व रखती हैं। यहां पांच पारंपरिक विकल्प और उनके पीछे का आध्यात्मिक अर्थ समझते हैं।
मोर पंख
भगवान कृष्ण के बारे में सोचते ही सबसे पहले दिमाग में मोर पंख की छवि याद आती है। उन्हें परंपरागत रूप से मुकुट में मोर पंख धारण किए हुए दिखाया जाता है, जिससे यह भक्तों के बीच एक खास प्रतीक बन जाता है।
पूजा स्थल में एक साफ मोर पंख रखना शुभ माना जाता है। ज्योतिष और आध्यात्मिक नजरिए से भक्त अक्सर भगवान कृष्ण से जुड़े प्रतीकों को सकारात्मक ऊर्जा और सद्भाव से जोड़कर देखते हैं। इससे भी जरूरी है कि, यह पंख हमें याद दिलाता है कि चिंताओं को मन पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
कृष्ण की बांसुरी
भगवान कृष्ण की बांसुरी भी अपने आप में एक खास आध्यात्मिक संदेश देती है। इसे परंपरागत रूप से आकर्षण, प्रेम और सद्भाव का प्रतीक माना गया है।
बांसुरी का खोखला आकार अक्सर अहंकार रहित अवस्था का प्रतीक माना जाता है। पूजा कक्ष में कृष्ण की प्रतिमा या लड्डू गोपाल के साथ एक बांसुरी रखने की भी परंपरा निभाई जाती है।
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तुलसी का पौधा
वैष्णव परंपरा में तुलसी को बेहद शुभ और सम्मानीय माना जाता है। यह भगवान कृष्ण और भगवान विष्णु की पूजा में भी इस्तेमाल किया जाता है। कृष्ण पूजा के दौरान तुलसी के पत्ते पारंपरिक रूप से अर्पित किए जाते हैं और भोग बनाने में इनका इस्तेमाल किया जाता है।
इसलिए जन्माष्टमी के आसपास एक स्वस्थ तुलसी का पौधा घर लाना सिर्फ एक सजावटी प्रतीक से कहीं बढ़कर है। यदि आपके पास पहले से ही तुलसी का पौधा है तो उसकी नियमित रूप से पूजा-पाठ और ध्यान रखना चाहिए।
गाय और बछड़े का प्रतीक
कृष्ण जी की बचपन की कहानियों में उन्हें गोकुल, गायों और ग्रामीण परिवेश से जोड़कर देखा जाता रहा है। उन्हें प्यार से गोविंद और गोपाल कहकर पुकारा जाता है।
इसलिए जन्माष्टमी पर गाय और बछड़े की एक छोटी सी मूर्ति कृष्ण वेदी के पास या घर के किसी साफ स्थान पर रखना चाहिए। परंपरागत रूप से यह प्रतीक पोषण, स्नेह, पारिवारिक देखभाल और कृतज्ञता से जुड़ा हुआ है।
लड्डू गोपाल की मूर्ति
कई वैष्णव भक्तों के लिए कृष्ण जन्माष्टमी का मौका लड्डू गोपाल की मूर्ति को अपने घर में लाने का एक खास महत्व रखता है। भक्त कृष्ण के बाल स्वरूप की सेवा भाव वैसे ही करते हैं, जैसे छोटे बच्चे की होती है।
भक्त अपने पारिवारिक रीति-रिवाजों के मुताबिक, भोजन, जल, कपड़ा और सजावट का सामान अर्पित करते हैं। लेकिन लड्डू गोपाल को घर लाना सिर्फ एक उत्सव का रिवाज ही नहीं माना गया है, बल्कि नियमित देखभाल और पूजा करनी भी जरूरी है।
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