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घर के मंदिर में 1 या 2? जानिए कितनी अगरबत्ती जलाना होता है शुभ और क्या कहते हैं शास्त्र

Published: Fri, 21 Aug 2026 08:08 AM (IST)Updated: Fri, 21 Aug 2026 08:38 AM (IST)

घर के मंदिर में रोजाना पूजा के समय 1 या 2 कितनी अगरबत्ती जलानी चाहिए? जानिए सनातन शास्त्रों के नियम, श्लोक और इसके पीछे का धार्मिक कारण।

अगरबत्ती जलाने का तात्पर्य (AI-Generated Image)

अगरबत्ती जलाने का तात्पर्य (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। घर में सुबह-शाम जब भी पूजा होती है तो पहला काम दीया और अगरबत्ती जलाने का ही होता है। अगरबत्ती के बिना कोई भी पूजा अधूरी ही मानी जाती है। आपने इस बात को गौर भी किया होगा कि अगरबत्ती की सुगंध से पूरे घर में शांति और सकारात्मक फैल जाती है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह उलझन रहती है कि पूजा के दौरान कितनी अगरबत्ती जलानी चाहिए।

शास्त्रों का क्या मत है?

सनातन धर्म और पूजा-अनुष्ठानों से जुड़े ग्रंथों के अनुसार, भगवान की पूजा में किसी सबसे पहले भाव आता है। भक्ति भाव किसी भी वस्तु से ऊपर माना गया है। शास्त्रों में धूप या अगरबत्ती अर्पित करते समय इस प्रसिद्ध मंत्र के जप का भी विधान बताया गया है:

वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः।
आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥

इसका अर्थ है: हे प्रभु! वनस्पतियों और प्राकृतिक तत्वों के रस से निर्मित, उत्तम सुगंध से युक्त यह धूप सभी देवी-देवताओं को प्रिय है। कृपया मेरे इस भावपूर्ण समर्पण को स्वीकार करें।

इस श्लोक से साफ जाहिर होता है कि मुख्य उद्देश्य वातावरण को सुगंधित, शुद्ध और भक्तिमय बनाना है, न कि केवल धुआं फैलाना।

1 या 2 अगरबत्ती का धार्मिक महत्व

1 अगरबत्ती: यह 'एकमेवाद्वितीयम्' यानी ईश्वर के एक होने का प्रतीक है। यह आपकी एकनिष्ठ भक्ति और एकाग्रता का प्रतीक है।

2 अगरबत्ती: दो अगरबत्ती जलाना, 'शिव और शक्ति' अथवा 'जीवात्मा और परमात्मा' के संतुलन का प्रतीक माना जाता है।

यही वजह है कि घर के मंदिर में नियमित पूजा के दौरान 1 या 2 अगरबत्ती जलाना शास्त्रों के अनुसार बिल्कुल सही माना गया है।

ज़रूरत से ज़्यादा अगरबत्ती जलाने से क्यों बचें?

शास्त्र कभी भी पूजा में दिखावे या अति की अनुमति नहीं देते। अत्यधिक अगरबत्ती जलाने से मंदिर में बहुत ज़्यादा धुआं इकट्ठा हो जाता है, जिससे ध्यान लगाने में बाधा आ सकती है और सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है। पूजा का मूल मकसद मन को शांत करना है, इसलिए संतुलन बनाए रखना ही सबसे उत्तम माना गया है।

पूजा करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

अगरबत्ती को हमेशा एक सुरक्षित स्टैंड में ही लगाएं ताकि राख पूरे मंदिर में न फैले।

जलती हुई अगरबत्ती या दीये को कभी भी बिना निगरानी के न छोड़ें।

कोशिश करें कि प्राकृतिक चंदन, गुग्गल या गुलाब की सुगंध वाली अगरबत्ती का इस्तेमाल करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।