5 मुख और 10 भुजाओं वाले भगवान गणेश: जानिए कौन हैं 'हेरंब गणपति' और कैसे करें उनका व्रत?
हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत 31 अगस्त 2026 को रखा जाएगा, जिसमें भगवान गणेश की पूजा की जाती है। यह ...और पढ़ें

हेरंब संकष्टी चतुर्थी तिथि 2026

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के मुताबिक, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। भाद्रपद यानी भादो मास जिसकी शुरुआत 29 अगस्त 2026, शनिवार से हो चुकी है। ऐसे में इस महीने की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत और पूजन करने का विधान है।
धार्मिक मान्यता है कि, इस दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से तमाम तरह के बाधा दूर होते हैं और दुखों से छुटकारा मिलता है। हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत आखिर इस साल कब और किस दिन मनाया जाएगा? आइए जानते हैं इसका शुभ मुहूर्त, और पूजन विधि के बारे में।
हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत इस साल कब रखा जाएगा?
हिंदू पंचांग के मुताबिक, हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत इस साल 31 अगस्त 2026, सोमवार के दिन रखा जाएगा। चतुर्थी तिथि की शुरुआत सोमवार की सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर होगी।
वही इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 1 सितंबर 2026, मंगलवार की सुबह 8 बजकर 29 मिनट पर होगी। संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय रात 8 बजकर 29 मिनट पर दिखेगा। हालांकि अलग-अलग स्थानों पर समय में कुछ मिनट का अंतर देखने को मिल सकता है।

हेरंब गणपति (Picture Credits- AI Image)
हेरंब संकष्टी 2026 पूजा विधि (Heramb Sankashti 2026 puja method)
चतुर्थी तिथि की सुबह सूरज निकलने से पहले ब्रह्म मुहूर्त में ही स्नान कर लें।
इसके बाद लाल या पीले रंग के साफ कपड़े पहनकर दाहिने हाथ में जल, अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद घर के पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल से पवित्र करें।
गणेश जी की मूर्ति या फोटो को स्थापित करें। अगर पहले से स्थापित हैं तो मूर्ति को कपड़े से साफ करें।
भगवान गणेश की पूजा के दौरान उन्हें लाल फूल, दूर्वा, चंदन, कुमकुम, अक्षत, हल्दी और जनेऊ अर्पित करें।
बात जब भोग लगाने की आए तो उन्हें उनका पसंदीदा भोग अर्पित करें। इसमें मोदक, लड्डू, पान और फल शामिल करें।
इसके बाद शुद्ध घी का दीपक जलाएं और भगवान गणेश के सामने धूप अर्पित करें।
पूजा में भगवान गणेश का गं गणपतये नम: या गणेशाय नम: मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें।
शाम को भगवान गणेश की विधिवत शयन आरती करें।
रात को जब आसमान में चंद्रमा के दर्शन हो तो उन्हें जल से अर्घ्य दें।
चंद्र देव को अर्घ्य देने के बाद गणेश जी को भोग लगाएं और प्रसाद खाकर विधिवत तरीके से व्रत का पारण करें।
हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत क्यों रखते हैं?
हिंदू धार्मिक शास्त्र और ब्रह्मावैवर्त पुराण के मुताबिक, हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत का पालन करने से मुश्किल से मुश्किल समय में भी मन शांत रहने के साथ संकटों से मुक्ति मिलती है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक दमयंती ने महर्षि शरभंग के कहने पर इस व्रत को किया था।
हेरंब गणपति कौन हैं?
सामान्य गणेश प्रतिमा से हेरंब गणपति की प्रतिमा बिल्कुल अलग है। भगवान गणेश का यह स्वरूप निर्बल और असहाय लोगों के रक्षक माने जाते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण के मुताबिक, हेरंब में हे का मतलब असहाय या निर्बल औ रंब का मतलब रक्षा करने वाला होता है। इस तरह से हेरंब नाम का मतलब असहाय लोगों की रक्षा करने वाला देवता।
हेरंब गणपति के 5 मुख और 10 भुजाएं होते हैं। वहीं इनकी सवारी सिंह है जो गणपति की निर्भयता और सामर्थ्य का प्रतीक मानी जाती है।
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