विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हरतालिका तीज का नाम ‘हरतालिका’ क्यों पड़ा? माता पार्वती से जुड़ी पौराणिक कथा में छिपा है यह रहस्य

Published: Mon, 07 Sep 2026 07:26 PM (IST)

हरतालिका तीज व्रत माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए किया था। आइए जानें इसके ...और पढ़ें

हरतालिका तीज का नामकरण रहस्य माता पार्वती की पौराणिक कथा से जुड़ा (Picture Credit: AI Generated)

हरतालिका तीज का नामकरण रहस्य माता पार्वती की पौराणिक कथा से जुड़ा (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. हरतालिका का अर्थ सखियों द्वारा हरण करना है।

  2. माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की।

  3. महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी भी व्रत-त्योहार की ही तरह हरतालिका तीज का भी विशेष महत्व है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां माता पार्वती की पूजा करके अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। इस दिन से कई मान्यताओं और पूजा के तरीकों में से एक है माता पार्वती और भगवान शिव की मिट्टी की प्रतिमा बनाना और उनकी पूजा करना।

यह व्रत हर साल भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा। सुखी वैवाहिक जीवन की कामना और सुयोग्य वर की इच्छा से यह व्रत रखा जाता है। इस व्रत के नाम को लेकर मन में एक सवाल आता है कि आखिर इसका नाम 'हरतालिका' ही क्यों रखा गया? आइए आपको बताते हैं इसके कारणों और इस नाम के मतलब के बारे में।

हरतालिका शब्द का अर्थ क्या है?

हरतालिका शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है 'हरत' और 'आलिका'। जिसका अर्थ है हरत यानी 'हरण' और आलिका यानी 'सखी' है। इस प्रकार हरतालिका शब्द का अर्थ है 'सखियों द्वारा हरण करना'।

शिव पुराण में लिखी हुई हरतालिका व्रत की कथा के अनुसार यह व्रत पहली बार माता पार्वती से भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए किया था। इस व्रत और तपस्या को करने के लिए माता पार्वती की सखियां उनका हरण करके उन्हें वन में ले गई थीं, जिससे माता पार्वती बिना किसी बाधा के अपनी तपस्या करें। तभी से इस व्रत का नाम 'हरतालिका' पड़ा।

शिव पुराण के अनुसार हरतालिका तीज व्रत की कथा

हरतालिका तीज की कथा के अनुसार, पार्वती जी की सहेलियां उनका अपहरण करके उन्हें घने जंगल में ले गईं क्योंकि उस समय माता पार्वती के पिता उनकी इच्छा के विपरीत उनका विवाह विष्णु जी से करना चाहते थे। उस समय माता पार्वती जी की सखियों ने उनका अपहरण कर उन्हें जंगल में छिपा दिया, जिससे माता पार्वती के पिता उनका विवाह उनकी इच्छा के विपरीत न कर पाएं। पार्वती जी शिव जी को मन ही मन अपना पति मान चुकी थीं।

इसलिए उनकी सखियों ने उनका साथ दिया और भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के हस्त नक्षत्र में माता पार्वती ने रेत का शिवलिंग बनाकर भोलेनाथ की तपस्या की।

माता पार्वती ने इस पूरे समय के दौरान अन्न का त्याग भी कर दिया था और पूरे 17 साल सिर्फ कंदमूल खाकर ही तपस्या की। पार्वती के इस कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने माता पार्वती को दर्शन देकर उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। उसी समय से यह व्रत अखंड सौभाग्य और अच्छे जीवनसाथी की कामना में महिलाओं और कुंवारी कन्याओं द्वारा रखा जाने लगा।

कैसे किया जाता है हरतालिका तीज का व्रत?

इस व्रत के पहले दिन महिलाएं अपने मायके जाती हैं या फिर मायके से उनके लिए सिंजारा भेजा जाता है जिसमें सुहाग की सभी चीजें होती हैं।

व्रत के दूसरे दिन महिलाएं और लड़कियां पति की दीर्घायु की कामना में निर्जला व्रत करती हैं और शिव मंदिरों में जाकर शिव जी की आराधना की जाती है। हरतालिका तीज की पूजा में मुख्य रूप से मिट्टी से बने शिवलिंग की पूजा की जाती है। इस पर्व के तीसरे दिन महिलाएं प्रातः स्नान करने के बाद शिव मंदिर में जाकर माता पार्वती को सोलह श्रृंगार चढ़ाती हैं और पानी पीकर व्रत का पारण करती हैं।

हरतालिका तीज का व्रत महिलाओं के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है और विधि-विधान के साथ पूजा करने से भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद मिलता है।

यह भी पढ़ें- हरतालिका तीज पर इन फूलों से करें शिव-पार्वती का श्रृंगार, इन 3 पुष्पों को चढ़ाने से बचें

यह भी पढ़ें- कुंवारी लड़कियां क्यों रखती हैं हरतालिका तीज का व्रत, इसके पीछे की मान्यता और सही नियम क्या हैं?

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।