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कुंवारी लड़कियां क्यों रखती हैं हरतालिका तीज का व्रत, इसके पीछे की मान्यता और सही नियम क्या हैं?

Published: Mon, 31 Aug 2026 08:00 PM (IST)

हरतालिका तीज का व्रत सुहागिनों के साथ कुंवारी लड़कियां भी सुयोग्य वर की कामना के लिए रखती हैं। यह व्रत ...और पढ़ें

कुंवारी लड़कियों के लिए हरतालिका तीज व्रत: महत्व और नियम (Picture Credit: AI Generated)

कुंवारी लड़कियों के लिए हरतालिका तीज व्रत: महत्व और नियम (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. कुंवारी लड़कियां सुयोग्य वर प्राप्ति के लिए रखती हैं व्रत।

  2. माता पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने को किया।

  3. कुंवारी लड़कियों के लिए हरतालिका तीज व्रत के विशेष नियम।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी भी पर्व की तरह हरतालिका तीज के व्रत का भी विशेष महत्व होता है। हर साल यह त्योहार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। वैसे तो मुख्य रूप से तीन तीज व्रत रखे जाते हैं, लेकिन इनमें से हरतालिकातीज का अपना अलग महत्व है।

यह तीज मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए होता है, जिसमें वो निर्जला उपवास रखकर पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। मान्यता है कि इस दिन निर्जला उपवास करने वाली स्त्रियों को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है और भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद भी मिलता है।

वैसे तो यह पर्व मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए होता है, लेकिन इसे कुंवारी लड़कियां भी रखती हैं। आइए आपको बताते हैं किन कारणों से हरतालिका तीज का व्रत कुंवारी लड़कियों के लिए खास होता है और इस व्रत को करने के नियम क्या हैं?

हरतालिका तीज क्यों मनाया जाता है?

हरतालिका तीज मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं का पर्व है। यह पर्व माता पार्वती को समर्पित है और ऐसा कहा जाता है कि यह तीज का व्रत माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए रखा था। उसी समय से इस व्रत का महत्व इतना ज्यादा बढ़ गया कि इसे न सिर्फ सुहागिन महिलाएं रखती हैं बल्कि कुंवारी लड़कियों के लिए भी यह अत्यंत प्रभावी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि कुंवारी लड़कियां इस व्रत को एक अच्छे जीवनसाथी की कामना में रखती हैं।

क्या कुंवारी लड़कियां हरतालिका तीज व्रत रख सकती हैं?

अगर हम पौराणिक कथाओं की मानें तो माता पार्वती ने भगवान शिव को जीवनसाथी के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की और उनकी भक्ति में दिन रात लीन रहीं।

उनकी भक्ति को देखते हुए भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार कर लिया। जिस दिन देवी पार्वती का भगवान शिव से मिलन हुआ था उस दिन को ही हरतालिका तीज के रूप में मनाया जाने लगा।

कुंवारी लड़कियां हरतालिका तीज का व्रत कर सकती हैं क्योंकि जिस प्रकार माता पार्वती को उनकी तपस्या और व्रत के परिणाम से भगवान शिव की प्राप्ति हुई थी, वैसे ही जो कुँवारी लड़की हरतालिका तीज का व्रत करती है उसे भी सुयोग्य वर मिलता है।

कुंवारी लड़कियों के लिए हरतालिका तीज व्रत के नियम

इस व्रत के नियम सुहागिन महिलाओं और कुंवारी लड़कियों के लिए लगभग एक समान ही हैं। आइए जानें इसके बारे में-

  • कुंवारी लड़कियों को पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ हरतालिका तीज का व्रत रखने के संकल्प करना चाहिए।
  • आप इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर इस व्रत का संकल्प करें। आप इस व्रत को निर्जला या फलाहार के साथ दोनों तरीकों से कर सकती हैं।
  • आप जिस तरह से व्रत करना चाहती हैं, उसका संकल्प लेते हुए व्रत शुरू करें। इस दिन आप स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूरे दिन व्रत का पालन करें।
  • कुंवारी लड़कियों को पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए।
  • इस दिन आप भगवान शिव और पार्वती की मूर्तियों को एक साफ चौकी पर स्थापित करें और फल, फूल के साथ मिठाई अर्पित करें।
  • पूरे दिन इस व्रत का पालन करें और सच्चे मन से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
  • अगले दिन इस व्रत का पारण करें और माता पार्वती को सुहाग की सामग्री चढ़ाने के साथ प्रसाद अर्पित करें और इस प्रसाद को व्रत का पारण करते समय ग्रहण करें।
  • माता पार्वती से व्रत की सफलता और सुयोग्य जीवनसाथी की कामना करें और इस व्रत को समाप्त करें।

यदि आप सुयोग्य जीवनसाथी की चाह में हरतालिका तीज का व्रत रख रही हैं, तो यहां बताए नियमों का पालन करते हुए इस व्रत को करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।