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भौम प्रदोष 2026: कर्ज और जमीन से जुड़े मामलों के लिए क्यों खास माना जाता है ये व्रत?

Published: Sun, 06 Sep 2026 07:00 PM (IST)Updated: Tue, 08 Sep 2026 08:38 AM (IST)

हिंदू धर्म में किसी भी प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है और इस दिन शिव जी की पूजा से विशेष ...और पढ़ें

सितंबर भौम प्रदोष व्रत: सही तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व (Picture Credit: AI Generated)

सितंबर भौम प्रदोष व्रत: सही तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. भाद्रपद का पहला प्रदोष व्रत 8 सितंबर को रखा जाएगा।

  2. भौम प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:35 से 8:52 बजे तक।

  3. कर्ज मुक्ति, भूमि विवाद, मंगल शांति के लिए यह व्रत महत्वपूर्ण।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। किसी भी महीने में पड़ने वाला प्रदोष व्रत हिंदू धर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा होती है। आमतौर पर यह व्रत किसी भी महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को होता है, लेकिन इसका अनुमान प्रदोष काल से लगाया जाता है।

इसका मतलब यह हुआ कि यदि प्रदोष काल की पूजा का मुहूर्त द्वादशी तिथि पर पड़ता है, तो इसी दिन व्रत किया जाता है। जब यह व्रत सोमवार को पड़ता है तो इसे सोम प्रदोष कहा जाता है, मंगलवार के दिन पड़ने वाला भौम प्रदोष कहलाता है, शनिवार के दिन पड़ने पर इसे शनि प्रदोष कहा जाता है।

इन सभी तिथियों का विशेष महत्व है। हर महीने की तरह भाद्रपद यानी सितंबर महीने में भी दो प्रदोष व्रत पड़ने वाले हैं। इनमें से पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा और इसकी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? इसके बारे में हम आपको यहां बताने जा रहे हैं।

सितंबर में कब रखा जाएगा पहला प्रदोष व्रत?

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 8 सितंबर यानी आज दोपहर 2:42 बजे आरंभ होगी और 9 सितंबर को दोपहर 12:30 बजे इसका समापन होगा।

वैसे तो उदया तिथि के अनुसार त्रयोदशी तिथि 09 सितंबर को पड़ रही है, लेकिन प्रदोष काल 08 सितंबर को पड़ने की वजह से इसी दिन प्रदोष का व्रत करना शुभ होगा। चूंकि 08 सितंबर को मंगलवार है, इसलिए यह प्रदोष व्रत भौम प्रदोष कहलाएगा।

सितंबर भौम प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त

आज के दिन भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त शाम 6:35 बजे से रात्रि 8:52 बजे तक का है।
शिव पूजा के लिए इस दिन लगभग 2 घंटे 18 मिनट का समय मिल रहा है, जो अत्यंत शुभ माना जा रहा है।

  • ब्रह्म मुहूर्त- 09 सितंबर- प्रातः 4:31 बजे से 5:17 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त- 09 सितंबर प्रातः 11:54 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक है।
  • निशिता काल 9 सितंबर को रात्रि 11:56 बजे से 12:42 बजे तक रहेगा।
  • चूंकि प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में ही की जाती है, इसलिए आपके लिए शिव पूजन के लिए यही मुहूर्त सबसे शुभ है।

सितंबर भौम प्रदोष व्रत का महत्व

जब प्रदोष व्रत का दिन किसी भी मंगलवार को पड़ता है, तो इसे भौम प्रदोष कहा जाता है। भौम प्रदोष, जिसे मंगल प्रदोष भी कहते हैं यह कर्ज से मुक्ति पाने, जमीन से जुड़े विवादों को सुलझाने और शारीरिक शक्ति को बढ़ाने के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है।

यह व्रत शिव जी की कृपा पाने के साथ कुंडली में मंगल की स्थिति को मजबूत करने लिए भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। जो भक्त विधि-विधान के साथ भौम प्रदोष का व्रत करता है उसे जीवन में मंगल के नकारात्मक प्रभावों से बचने में भी मदद मिलती है।

जो व्यक्ति मंगलवार को भौम प्रदोष व्रत रखता है, उसे भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा भी करनी चाहिए, इससे उसके सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सफलता के योग बनते हैं।

अगर आप भी प्रदोष का व्रत करते हैं तो सही तिथि पर शुभ मुहूर्त में की गई पूजा सबसे ज्यादा फलदायी मानी जाती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।