रस्सी छोटी पड़ गई पर नहीं बंधे कान्हा, ये हैं बाल कृष्ण की 4 सबसे खास लीलाएं
भगवान श्रीकृष्ण के बचपन की लीलाएं द्वापर युग से ही प्रसिद्ध हैं, जिन्हें आज भी बड़े प्रेम से सुनाया जाता ...और पढ़ें

बाल गोपाल के 4 अद्भुत चमत्कार (Picture Credit: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान श्रीकृष्ण का बचपन कई महत्वपूर्ण लीलाओं से भरा हुआ है। द्वापर युग के दौरान मथुरा, गोकुल और वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण ने ऐसी कई तरह की लीलाएं की हैं, जिन्हें लोग आज के समय भी बड़े प्रेम से सुनते और सुनाते हैं और भगवान श्रीकृष्ण के बचपन को याद करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्रीमद्भागवत पुराण में भगवान श्रीकृष्ण की ऐसी लीलाओं को वर्णन किया गया है, जिन्हें बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर नहीं पता, तो ऐसे में चलिए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के बचपन से जुड़ी लीलाओं के बारे में।
-1783231734886.jpg)
(Picture Credit: AI Generated)
माखन चोरी लीला- भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी लीला अधिक लोकप्रिय है। बचपन में गोकुल में भगवान श्रीकृष्ण सखाओं के साथ मिलकर लोगों के घर जाकर माखन चुराते थे। साथ ही वे माखन अपने मित्रों को भी खिलते थे। जब गोपियों को माखन चोरी के बारे में पता चलता था, तो गोपियां माता यशोदा से शिकायत करने आतीं थीं।
पूतना वध- जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तो कुछ समय के बाद कंस ने उन्हें मारने के लिए पूतना नाम की राक्षसी को गोकुल भेजा था। भयानक राक्षसी का एक मकसद था कि भगवान श्रीकृष्ण को विष पिलाकर नन्हें कान्हा की जान लेना था। जब राक्षसी ने भगवान श्रीकृष्ण को दूध पिलाना शुरू किया, तो भगवान ने उसके प्राण खींच लिए। इसके बाद राक्षसी तड़फ कर जमीन पर गिर गई।
यह भी पढ़ें- खाटू श्याम जी के 12 नाम और उनका अर्थ: क्यों कहलाते हैं 'हारे का सहारा' और 'शीश के दानी'
ओखली बंधन लीला- भगवान श्रीकृष्ण बचपन में माखन चुराया करते थे। एक बार माता यशोदा ने माखन चुराने को लेकर क्रोध में आकर भगवान श्रीकृष्ण को ओखली से बांधने लगीं, लेकिन हर बार जब वे रस्सी बांधतीं, तो रस्सी छोटी पड़ जाती। इसके बाद माता यशोदा थक गईं, तो भगवान ने प्रेम वश समर्पण किया। इसके बाद वे रस्सी से बंधे।
गोवर्धन पर्वत धारण लीला- द्वापर युग में इंद्र का अहंकार अधिक बढ़ गया था, तो भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के अहंकार और भारी बारिश से बचाने के लिए अपनी कनिष्ठ अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठाया। इसके बाद ब्रजवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करने की शुरुआत की। इससे क्रोध में आकर इंद्र देव ने भारी बारिश की थी। उस दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की गोवर्धन पर्वत को उठा कर मदद की।
यह भी पढ़ें- सिर्फ सुदामा और अर्जुन ही नहीं! कृष्ण जी के 'क्लोज फ्रेंड ग्रुप' में शामिल थे ये 10 नाम
यह भी पढ़ें- कहीं आप भी तो नहीं कर रहे बिना कपड़ों के नहाने की भूल? शास्त्रों में मिलता है स्नान करने का सही तरीका
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
