कहीं आप भी तो नहीं कर रहे बिना कपड़ों के नहाने की भूल? शास्त्रों में मिलता है स्नान करने का सही तरीका
हिंदू धर्म में निर्वस्त्र होकर स्नान करना वर्जित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, ऐसा करने से जल देवता, पितर और देवी लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं, जिससे ...और पढ़ें
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बिना कपड़ों के नहाने की भूल से बचें (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
मनुस्मृति में निर्वस्त्र स्नान को वर्जित बताया गया है
श्रीकृष्ण ने गोपियों को जल देवता के सम्मान का पाठ पढ़ाया
नग्न स्नान से पितृ दोष और नकारात्मक ऊर्जा का खतरा
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में हर एक चीज को करने का अपना अलग नियम और तरीका होता है। अपने जीवन को सही तरीके से जीने के लिए इन नियमों को पालन जरूरी माना गया है।
व्यक्ति को समाज में कैसे रहना चाहिए, किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और कैसे प्रकृति का सम्मान कैसे करना चाहिए, इन सभी बातों का वर्णन हमारे शास्त्रों में मिलता है। ऐसा एक नियम नहाने से भी जुड़ा हुआ है। अक्सर लोग नहाते समय अपने पूरे कपड़े हटा देते हैं, लेकिन असल में हिंदू धर्म में निर्वस्त्र होकर नहाने की मनाही है। आइए जानते हैं इस बारे में क्या कहते हैं हमारे शास्त्र-
नहाने से जुड़े इस नियम के बारे में मनुस्मृति में विस्तार से बताया गया है। मनुस्मृति में इसे लेकर एक श्लोक मिलता है, जिसमें यह बताया गया है कि नहाते समय पूरे कपड़े हटाना नहीं चाहिए। मनुस्मृति के अध्याय-4 के 45वें श्लोक में कहा गया है-
"नान्नमद्यादेकवासा न नग्नः स्नानमाचरेत् ।न मूत्रं पथि कुर्वीत न भस्मनि न गोव्रजे ॥ ४५ ॥"
मतलब- इस एक श्लोक में व्यक्तिगत मर्यादा और समाज की स्वच्छता के बहुत ही कड़े और जरूरी नियम बताए गए हैं। इसका सीधा सा अर्थ है: “व्यक्ति को सिर्फ एक वस्त्र धारण करके (या बिना शालीन कपड़ों के) भोजन नहीं करना चाहिए, पूरी तरह से निर्वस्त्र (बिना कपड़ों के) होकर स्नान नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, आम रास्ते पर, राख (भस्म) पर और गौशाला (गायों के रहने की जगह) में कभी भी मल-मूत्र का त्याग नहीं करना चाहिए।”
श्रीकृष्ण ने दी गोपियों की सीख
नहाने से इस नियम से जुड़ा एक प्रसंग द्वापर युग में भी देखने में मिलता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार वृंदावन की गोपियां अपने सारे कपड़े किनारे पर रखकर यमुना सरोवर में नहा रही थीं। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनके वस्त्र छिपा दिए।
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जब गोपियों ने अपने कपड़े वापस मांगे, तो कान्हा ने उन्हें जीवन का एक बहुत बड़ा सबक दिया। उन्होंने समझाया कि नदियां या जल सिर्फ पानी नहीं, बल्कि साक्षात 'जल देवता' हैं। पूरी तरह से निर्वस्त्र होकर जल में प्रवेश करना प्रकृति और जल देवता का अपमान है। यह सुनकर गोपियों ने अपनी भूल मानी और हमेशा मर्यादा में रहने का वचन दिया।
गरुड़ पुराण में भी है वर्णन
हमारे पवित्र ग्रंथ 'गरुड़ पुराण' और 'पद्म पुराण' में भी इस नियम का बहुत गहराई से जिक्र किया गया है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, हमारे दिवंगत पूर्वज अदृश्य रूप में हमेशा हमारे आस-पास ही मौजूद रहते हैं। पद्म पुराण में बताया गया है कि जब हम स्नान करते हैं, तो वह जल सूक्ष्म रूप में हमारे पितरों को भी प्राप्त होता है। ऐसे में अगर हम निर्वस्त्र नहाते हैं, तो यह पूर्वजों के सामने बिना कपड़ों के आने जैसा है। इससे उनकी आत्मा को दुख पहुंचता है और अनजाने में इंसान 'पितृ दोष' का शिकार हो सकता है।
इसके अलावा बिना कपड़ों से नहाने से नकारात्मक ऊर्जा आसानी से प्रवेश कर जाती है। इससे इंसान के विचारों में भी नकारात्मकता आने लगती है। साथ ही धन और मर्यादा की देवी माता लक्ष्मी भी नाराज हो सकती हैं। इसलिए नहाते समय शरीर पर कोई एक पतला कपड़ा या तौलिया लपेटने की सलाह दी जाती है।