भाद्रपद मास 2026: पूजा में न करें ये 4 बड़ी गलतियां, जान लें भादो के जरूरी नियम
भाद्रपद मास में भगवान श्रीकृष्ण, गणेश जी और विष्णु जी की पूजा का विशेष महत्व है। जानिए इस पवित्र महीने में किन नियमों का पालन करना चाहिए।

भाद्रपद मास में क्या करें? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भाद्रपद यानी भादो के महीने का विशेष धार्मिक महत्व है। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में भाद्रपद मास की शुरुआत 29 अगस्त से हो चुकी है, जो 26 सितंबर तक रहने वाला है। यह पूरा महीना भगवान श्रीकृष्ण, श्रीगणेश और भगवान विष्णु की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
इस दौरान कृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका तीज (Hartalika Teej 2026), गणेश चतुर्थी, राधा अष्टमी और अनंत चतुर्दशी जैसे कई बड़े व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं।
मान्यता है कि भादो में पूजा-पाठ का फल तभी पूरी तरह मिलता है, जब नियमों का सही से पालन किया जाए। इस दौरान की गई छोटी-सी लापरवाही भी पूजा के फल को कम कर सकती है। आइए जानते हैं इस महीने पूजा करते समय किन बातों का ध्यान सबसे ज्यादा जरूरी है:
1. ताजी पूजा सामग्री का इस्तेमाल
भगवान की पूजा में चढ़ाई जाने वाली हर चीज शुद्ध और ताजी होनी चाहिए। बासी फूल, सड़े-गले फल या गंदे गंगाजल का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित है। इसलिए, इसे भूलकर भी उपयोग में न लाएं। पूजा के लिए इस्तेमाल होने वाले बर्तनों और लोटे को रोज साफ करें।
2. भगवान को चढ़ाए गए प्रसाद का सम्मान
भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद को पूरे आदर और सम्मान के साथ ग्रहण करें। प्रसाद को इधर-उधर फेंकने या किसी गंदी जगह रखने की गलती बिलकुल न करें। अगर प्रसाद ज्यादा है, तो उसे परिवार, पड़ोसियों और जरूरतमंदों में बांट दें।
3. सात्विक दिनचर्या अपनाएं
भादो के महीने में घर का माहौल पूरी तरह से सात्विक रखना चाहिए। इस दौरान प्याज, लहसुन, मांस-मछली और मदिरा (नशीली पदार्थ) जैसी तामसिक चीजों से दूरी बनाकर रखें। भगवान को अर्पित किया जाने वाला भोग भी पूरी तरह शुद्ध होना चाहिए।
4. तुलसी दल तोड़ने के नियम
भगवान विष्णु और राधा-कृष्ण की पूजा बिना तुलसी दल के अधूरी मानी जाती है। लेकिन, ध्यान रखें कि रविवार, एकादशी, द्वादशी तिथि और शाम के समय तुलसी के पत्ते गलती से भी न तोड़ें। तुलसी हमेशा सुबह स्नान करने के बाद ही तोड़नी चाहिए।
भादो का महीना भक्ति, संयम और सात्विकता का प्रतीक है। रोज सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर दीपक जलाएं और ईश्वर से सुख-शांति की प्रार्थना करें।
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