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    बिना इस आरती के अधूरी है अक्षय तृतीया की पूजा, मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए जरूर करें इसका पाठ

    Updated: Sun, 19 Apr 2026 06:20 AM (IST)

    अक्षय तृतीया का दिन बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। ...और पढ़ें

    Akshaya Tritiya 20226: अक्षय तृतीया की आरती।

    Akshaya Tritiya 20226: अक्षय तृतीया की आरती। 

    HighLights

    1. अक्षय तृतीया का दिन बेहद फलदायी माना जाता है

    2. यह दिन माता लक्ष्मी को समर्पित है

    3. इस दिन सोना खरीदने का महत्व है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शास्त्रों में कहा गया है कि किसी भी देवी-देवता की पूजा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती, जब तक अंत में श्रद्धापूर्वक उनकी आरती न की जाए। आरती पूजा में रह गई कमियों को दूर करती है। अक्षय तृतीया जैसे सिद्ध मुहूर्त पर, जब हर कोई मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के में जुटा होता है, तब आरती का महत्व और भी बढ़ जाता है।

    अगर आप भी इस अक्षय तृतीया पर धन-धान्य और सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं, तो पूजा के अंत में मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की की आरती करना न भूलें, जो इस प्रकार हैं -

    Akshaya Tritiya aarti 2

    ॥माता लक्ष्मी की आरती॥

    महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं,

    नमस्तुभ्यं सुरेश्वरि ।

    हरि प्रिये नमस्तुभ्यं,

    नमस्तुभ्यं दयानिधे ॥

    पद्मालये नमस्तुभ्यं,

    नमस्तुभ्यं च सर्वदे ।

    सर्वभूत हितार्थाय,

    वसु सृष्टिं सदा कुरुं ॥

    ॐ जय लक्ष्मी माता,

    मैया जय लक्ष्मी माता ।

    तुमको निसदिन सेवत,

    हर विष्णु विधाता ॥

    उमा, रमा, ब्रम्हाणी,

    तुम ही जग माता ।

    सूर्य चद्रंमा ध्यावत,

    नारद ऋषि गाता ॥

    ॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

    दुर्गा रुप निरंजनि,

    सुख-संपत्ति दाता ।

    जो कोई तुमको ध्याता,

    ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥

    ॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

    तुम ही पाताल निवासनी,

    तुम ही शुभदाता ।

    कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,

    भव निधि की त्राता ॥

    ॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

    जिस घर तुम रहती हो,

    ताँहि में हैं सद्‍गुण आता ।

    सब सभंव हो जाता,

    मन नहीं घबराता ॥

    ॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

    तुम बिन यज्ञ ना होता,

    वस्त्र न कोई पाता ।

    खान पान का वैभव,

    सब तुमसे आता ॥

    ॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥

    ॥कुबेर जी की आरती॥

    ॐ जय यक्ष कुबेर हरे,

    स्वामी जय यक्ष जय यक्ष कुबेर हरे।

    शरण पड़े भगतों के, भंडार कुबेर भरे।

    ॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे ॥

    शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,

    स्वामी भक्त कुबेर बड़े।

    दैत्य दानव मानव से, कई-कई युद्ध लड़े ॥

    ॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे ॥

    स्वर्ण सिंहासन बैठे, सिर पर छत्र फिरे,

    स्वामी सिर पर छत्र फिरे।

    योगिनि मंगल गावैं, सब जय जयकार करैं॥

    ॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे ॥

    गदा त्रिशूल हाथ में, शस्त्र बहुत धरे,

    स्वामी शस्त्र बहुत धरे।

    दुख भय संकट मोचन, धनुष टंकार करे॥

    ॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥

    भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,

    स्वामी व्यंजन बहुत बने।

    मोहन भोग लगावैं, साथ में उड़द चने॥

    ॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥

    यक्ष कुबेर जी की आरती,

    जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे ।

    कहत प्रेमपाल स्वामी, मनवांछित फल पावे।

    ॐ जय यक्ष कुबेर हरे,

    स्वामी जय यक्ष जय यक्ष कुबेर हरे।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।