कुंडली में है यह दोष, समय रहते लगा लें इस देवता की 12 परिक्रमा; कंगाल होने से बच जाएंगे
कुंडली में मंगल दोष करियर, विवाह और आर्थिक मामलों में बाधाएं उत्पन्न करता है, जिससे व्यक्ति कंगाल भी हो सकता ...और पढ़ें

मंगल दोष से मुक्ति के उपाय । (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हमारा जीवन ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति पर बुहत कुछ निर्भर करता है। कुंडली में कमजोर ग्रह हमेशा ही दोष उत्पन्न करता है, जिसका सीधा प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है। कुंडली में मौजूद मंगल दोष भी इन्हीं में से एक है, जिसके होने से जीवन में बहुत सारी कठिनाइयां देखने को मिलती हैं। खासतौर पर करियर, विवाह और आर्थिक मामलों में मंगल ग्रह का शुभ स्थिति में होना बहुत जरूरी होता है।
यदि मंगल दोष के निवारण के उपाय सही समय पर न किए जाएं, तो व्यक्ति कंगाल तक हो सकता है। यदि आपकी कुंडली में भी मंगल दोष है, तो आपको भी इस ग्रह की स्थिति को मजबूत करने के लिए जरूरी उपाय कर लेने चाहिए। खासतौर पर मंगल देव की पूजा और उनकी परिक्रमा करने से मंगल दोष के प्रभाव को शांत किया जा सकता है। चलिए हम आपको मंगल देव की परिक्रमा की विधि और महत्व के बारे में विस्तार से बताते हैं।
मंगल देव की 12 परिक्रमा क्यों मानी जाती है खास?
ज्योतिष शास्त्र में कुंडली के 12 भाव जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें धन, परिवार, विवाह, करियर, स्वास्थ्य, संतान और शत्रु आदि से जुड़े भाव शामिल होते हैं। माना जाता है कि मंगल देव की 12 परिक्रमा करने से कुंडली के सभी 12 भावों में मंगल से जुड़े अशुभ प्रभावों को शांत किया जा सकता है।
कहां करें मंगल देव की 12 परिक्रमा?
मंगल दोष से जुड़े उपायों के लिए उज्जैन का मंगलनाथ मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंगलनाथ मंदिर को मंगल देव की जन्मभूमि माना जाता है। यहां मंगल ग्रह से संबंधित विशेष पूजा या अनुष्ठान भी किए जाते हैं। यदि उज्जैन जाना संभव न हो तो किसी प्राचीन शिव मंदिर या नवग्रह मंदिर में स्थापित मंगल देव की प्रतिमा की परिक्रमा की जा सकती है।
मंगलवार को ऐसे करें 12 परिक्रमा
- मंगल देव की परिक्रमा के लिए मंगलवार का दिन शुभ माना जाता है। सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। लाल रंग के वस्त्र को मंगल से संबंधित माना जाता है, इसलिए इस दिन लाल वस्त्र पहनने की सलाह दी जाती है।
- मंदिर पहुंचकर सबसे पहले मंगल देव को लाल फूल, लाल चंदन और मसूर की दाल जैसी वस्तुएं श्रद्धानुसार अर्पित करें। इसके बाद दीपक जलाकर मंगल देव का ध्यान करें।
- अब मंगल देव की 12 परिक्रमा करें। परिक्रमा के दौरान मन में मंगल देव के इस मंत्र "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः।" का जाप करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखें और मंगल देव से जीवन में साहस, संयम और सकारात्मक ऊर्जा मिलने की प्रार्थना करें।
मंगल दोष कम करने के अन्य उपाय
- मंगल दोष और आर्थिक परेशानियों से राहत पाने के लिए लगातार 21 मंगलवार का व्रत रखना भी अच्छा उपाय है। इस व्रत में नमक का सेवन नहीं करते और सात्विक भोजन लेते हैं।
- उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में मंगल ग्रह से संबंधित भात पूजा भी कराई जा सकती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पूजा को मंगल दोष की शांति के लिए कराया जाता है।
अत: अपने कर्मों को सुधारें और मंगल ग्रह को शांत करने के लिए ऊपर बताए गए उपाय करें।
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