Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    Hanuman Chalisa: मंगलवार को इस खास विधि से करें हनुमान चालीसा का पाठ, शनि और मंगल दोनों होंगे शांत

    Updated: Mon, 23 Feb 2026 09:00 PM (IST)

    मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित है। इस दिन उनकी पूजा करने और हनुमान चालीसा का पाठ करने से जीवन के कष्ट, दुःख और संकट दूर होते हैं तथा सुखों का ...और पढ़ें

    हनुमान जी को कैसे प्रसन्न करें?

    हनुमान जी को कैसे प्रसन्न करें? 

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मंगलवार का दिन भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी को समर्पित है। इस दिन बजरंगबली की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही मंगलवार का व्रत रखा जाता है। इस दिन हनुमान जी के दर्शन हेतु मंदिरों में भक्तजन की लंबी कतार लगी रहती है। भक्तजन अपने आराध्य हनुमान जी की भक्ति भाव से पूजा करते हैं।

    Hanuman ji

    धार्मिक मत है कि हनुमान जी की पूजा करने से काल, कष्ट, दुःख और संकट दूर हो जाते हैं। साथ ही जीवन में सुखों का आगमन होता है। अगर आप भी हनुमान जी की कृपा और जीवन में व्याप्त संकटों से निजात पाना चाहते हैं, तो मंगलवार के दिन पूजा के समय हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें।

    विधि

    मंगलवार के दिन स्नान-ध्यान के बाद आचमन कर स्वयं को शुद्ध कर लें। इस समय लाल रंग के कपड़े धारण करें। अब सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें। इसके बाद विधिवत हनुमान जी की पूजा करें। पूजा के समय हनुमान जी को लाल रंग का फल और फूल अर्पित करें। इस समय एक चुटकी सिंदूर अर्पित करें। अब अपनी मनोकामना हनुमान जी से करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।

    हनुमान चालीसा

    दोहा:

    श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
    बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
    बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
    बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

    चौपाई:

    जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
    रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
    महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।
    कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा।।
    हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै।
    संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन।।
    विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।
    प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।
    सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
    भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।।
    लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
    रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
    सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
    सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।
    जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते।।
    तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
    तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
    जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
    प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
    दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
    राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
    सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।।
    आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।।
    भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।
    नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
    संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
    सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।
    और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।।
    चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।।
    साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।
    अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
    राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।
    तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
    अंतकाल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।।
    और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेई सर्व सुख करई।।
    संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
    जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
    जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई।।
    जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
    तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।
    दोहा:
    पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
    राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

    खबरें और भी

    यह भी पढ़ें- शनि दोष से मुक्ति दिलाएंगे ये 7 चमत्कारी टोटके, रातों-रात बदलेगी आपकी किस्मत

    यह भी पढ़ें- Mangalwar Rules: मंगलवार के दिन क्या करें और क्या नहीं? रखें इन बातों का विशेष ध्यान

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।