शत्रुओं और तंत्र-बाधा का होगा जड़ से नाश, कालाष्टमी पर करें भगवान भैरव के 'सिद्ध मंत्रों' का जप
मासिक कालाष्टमी पर काल भैरव के मंत्रों का जप करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, साथ ही और भी कई लाभ मिलते हैं।

काल भैरव पूजा से पाएं तंत्र बाधा से मुक्ति
HighLights
10 अप्रैल को मनाई जाएगी वैशाख माह की कालाष्टमी
निशिता मुहूर्त में काल भैरव की पूजा का है विशेष महत्व
मंत्र जप से दूर होती हैं अकाल मृत्यु भय और बाधाएं
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, हर माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली अष्टमी तिथि पर मासिक कालाष्टमी मनाई जाती है। ऐसे में वैशाख माह की कालाष्टमी शुक्रवार 10 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन पर निशिता मुहूर्त में काल भैरव की पूजा करने का विधान है।
इस तिथि को खासतौर से तंत्र-मत्र की साधना करने वाले लोगों के लिए खास माना गया है। लेकिन गृहस्त लोग भी इस दिन पर काल भैरव के मंत्रों के जप से लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
कालाष्टमी व्रत का महत्व
कालाष्टमी तिथि के दिन विशेष रूप से भगवान शिव के रुद्रावतार काल भैरव भगवान की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में काल भैरव को तंत्र-मत्र का देवता के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि इस दिन विधि-विधान से काल भैरव देव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को अकाल मृत्यु के भय नहीं सताता।
साथ ही सांसारिक दुखों से भी मुक्ति मिलती है। कालाष्टमी पर निशिता मुहूर्त में काल भैरव की विशेष पूजा-अर्चना से साधक को शनि और राहु की बाधा से भी राहत मिल सकती है।
कालाष्टमी पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाएं।
- स्नान के बाद स्वच्छ या नए वस्त्र पहनें।
- सबसे पहले तांबे के पात्र से सूर्य देव को जल अर्पित करें।
- चूंकि भगवान भैरव, महादेव के ही अवतार हैं, इसलिए भगवान शिव का अभिषेक करें।
- शिव चालीसा और शिव मंत्रों का पाठ करें।
- निशा काल में भगवान भैरव की प्रतिमा या चित्र के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- उन्हें नारियल, इमरती या काले तिल से बनी वस्तुओं का भोग लगाएं।
- रात की पूजा के बाद फलाहार ग्रहण करें।
काल भैरव अष्टकम्
देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपङ्कजं
व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्।
नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं
नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्।
कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं
श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्।
भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं
भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम्।
विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं
कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम्।
स्वर्णवर्णशेषपाशशोभिताङ्गमण्डलं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं
नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरंजनम्।
मृत्युदर्पनाशनं करालदंष्ट्रमोक्षणं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसंततिं
दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम्।
अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकाधरं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥
भूतसंघनायकं विशालकीर्तिदायकं
काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम्।
नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं
काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥॥

(Picture Credit- AI Generated)
करें इन मंत्रों का जप
1. ॐ भैरवाय नमः
2. ॐ कालभैरवाय नमः
3. ॐ भ्रां कालभैरवाय फट्
4 ॐ ह्रीं बटुक भैरवाय नमः
5. ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं
6. ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नमः
7. भैरव गायत्री मंत्र - ॐ कालकालाय विद्महे कालतितयाय धीमहि तन्नो भैरवः प्रचोदयात्
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