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कालाष्टमी की रात क्यों चरम पर होती हैं तांत्रिक शक्तियां? कई गुना बढ़ जाता है तंत्र-मंत्र का असर

Published: Tue, 07 Apr 2026 06:00 PM (IST)

कालाष्टमी हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। यह महादेव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित ...और पढ़ें

कालाष्टमी पर करें ये उपाय (Image Source: AI-Generated)

कालाष्टमी पर करें ये उपाय (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को 'कालाष्टमी' (Kalashtami 2026) के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप 'काल भैरव' को समर्पित है। तंत्र शास्त्र में कालाष्टमी की रात को 'सिद्धि की रात' माना गया है। साल 2026 में वैशाख माह की कालाष्टमी 9 अप्रैल को पड़ रही है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात ब्रह्मांड की ऊर्जा का प्रवाह अन्य दिनों की तुलना में बहुत अधिक होता है। आइए जानते हैं कालाष्टमी की रात का वह रहस्य, जो इसे तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक शक्तियों के लिए इतना विशेष बनाता है।

क्यों शक्तिशाली होती है कालाष्टमी की रात?

शास्त्रों के अनुसार, काल भैरव को 'काशी का कोतवाल' और तंत्र का स्वामी माना गया है। कालाष्टमी की रात उनकी शक्तियां बेहद प्रबल होती हैं। तांत्रिकों का मानना है कि इस रात की गई साधना का फल 'अक्षय' होता है और भैरव जी की कृपा से साधक को भय पर विजय प्राप्त होती है।

इसलिए बढ़ती हैं तांत्रिक शक्तियां

अमावस्या के करीब होने के कारण इस रात अंधकार गहरा होता है। तंत्र शास्त्र में अंधकार को 'शून्य' माना गया है, जहां से नई ऊर्जा का सृजन होता है। इस समय तामसिक और सात्विक दोनों प्रकार की अदृश्य शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं, जिन्हें साधक मंत्रों के माध्यम से जागृत करते हैं।

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(Image Source: AI-Generate)

कालाष्टमी की रात और बाधा निवारण के महत्व

  • यह रात उन लोगों के लिए विशेष है जो गुप्त शत्रुओं या विरोधियों के कारण जीवन में परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
  • कोर्ट-कचहरी, मुकदमों या प्रशासनिक उलझनों से जूझ रहे लोगों के लिए इस समय की गई पूजा फलदायी मानी जाती है।
  • 'ऊपरी बाधा', नजर दोष या किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) के निवारण के लिए यह रात अत्यंत प्रभावशाली है।
  • सुरक्षा चक्र मजबूत करने और भय से मुक्ति पाने के लिए इस रात 'भैरव अष्टक' का पाठ करना सबसे उत्तम उपाय माना जाता है।
  • मान्यता है कि इस रात की गई साधना व्यक्ति के चारों ओर एक सुरक्षा कवच का निर्माण करती है, जिससे आगामी बाधाएं दूर होती हैं।

कैसे करें पूजा और बचाव?

दीपक उपाय: रात के समय घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

काले कुत्ते की सेवा: भगवान भैरव का वाहन कुत्ता है। ऐसे में इस दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी या बिस्कुट खिलाएं। इससे राहु-केतु के अशुभ प्रभाव भी शांत होते हैं।

मंत्र जप: इस "ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ" मंत्र का 108 बार जप करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।