संजीवनी बूटी के लिए हनुमान जी ने यहां किया विश्राम, पढ़ें शिमला के जाखू मंदिर का रहस्य
हिमाचल प्रदेश को देवताओं की भूमि कहा जाता है। प्राचीन समय में यह देवी-देवताओं और ऋषियों की तपस्थली रही है। साथ ही देवभूमि में कई प्रमुख धार्मिक स्थल भ ...और पढ़ें

Jakhu Temple: जाखू मंदिर से जुड़ा रहस्य (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। देवभूमि हिमाचल सुंदरता और कई चमत्कारी मंदिरों की वजह से देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहां कई देवी-देवताओं के मंदिर स्थित हैं, जो किसी मान्यता के कारण आस्था के केंद्र बने हुए हैं। इन्हीं मंदिरो में शिमला (Jakhu Temple in Shimla) का जाखू मंदिर भी शामिल है। यह मंदिर शिमला की सबसे ऊंची चोटी पर है, जिसकी ऊंचाई 2,438 मीटर है।
इस मंदिर में संकटमोचन भगवान हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। मदिर को विश्व की सबसे बड़ी मूर्ति के लिए जाना जाता है। ऐसा दवा किया जाता है कि मंदिर में आज भी बजरंगबली के पैरों के निशान मौजूद है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जाखू मंदिर में भगवान हनुमान जी ने संजीवनी बूटी को ले जाते समय विश्राम (Jakhu Hill Hanuman rest) किया। ऐसे में आइए आर्टिकल में आपको बताते हैं इस मंदिर के बारे में।
यहां किया हनुमान जी ने विश्राम (Hanuman Sanjeevani Booti story)
पौराणिक मान्यता (Shimla Jakhu Temple legend) के अनुसार, जब युद्ध के दौरान लक्ष्मण जी मेघनाथ के शक्ति बाण से मूर्छित हो गए थे। उस दौरान उनको बचाने के लिए हनुमान जी हिमालय से संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे। तब हनुमान जी की नजर जाखू पहाड़ी पर पड़ी। वहां पर यक्ष ऋषि तपस्या कर रहे थे। तब हनुमान जी विश्राम और संजीवनी बूटी की जानकारी लेने के लिए जाखू पहाड़ी पर उतरे। हनुमान जी के पैर रखने से पहाड़ी धंस गई। इसी वजह से जाखू पहाड़ी आज के समय में भी ऊपर से चपटी दिखाई देती है।

(Image Source: AI-Generated)
जब हनुमान जी वापस जाने लगे, तो उन्होंने वापस लौटते समय यक्ष ऋषि को दर्शन देने का वचन दिया, लेकिन कालनेमि राक्षस से युद्ध की वजह से ऋषि को दर्शन नहीं दिए। ऋषि के व्याकुल होने पर बाद में हनुमान जी ने दर्शन दिए। इसके बाद जाखू पहाड़ी हनुमान जी एक स्वयंभू मूर्ति प्रकट हुई। यक्ष ऋषि ने हनुमान जी का मंदिर बनवाया।
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ऐसा बताया जाता है कि जाखू मंदिर में बजरंगबली के पैरों के निशान का स्थान आज भी सुरक्षित है। मंदिर में भक्त हनुमान जी के पदचिह्नों की पूजा-अर्चना करते हैं और उनकी कृपा करते हैं।
source- https://hpshimla.nic.in/tourist-place/jakhoo-temple/
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