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जालंधर में मातृभाषा दिवस पर निकला पंजाबी जागृति मार्च; सम्मान में सड़कों पर उतरे विद्यार्थी व कलाकार

Published: Thu, 26 Feb 2026 12:24 PM (IST)

जालंधर में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर पंजाबी जागृति मार्च निकाला गया। संत, कलाकार, जनप्रतिनिधि और विद्यार्थी शामिल हुए। वक्ताओं ने ...और पढ़ें

मार्च में बैनर पकड़े हुए स्थानीय लोग।

मार्च में बैनर पकड़े हुए स्थानीय लोग।

HighLights

  1. अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर जालंधर में पंजाबी जागृति मार्च।

  2. छात्रों, कलाकारों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाषा सम्मान का संदेश दिया।

  3. दीपक बाली ने युवाओं में मातृभाषा के प्रति गौरव जगाने पर जोर दिया।

जागरण संवाददाता, जालंधर। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर जालंधर में पंजाब जागृति मार्च और जिला प्रशासन की ओर से पंजाबी जागृति मार्च का आयोजन किया गया। इस मार्च में समाज के विभिन्न वर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और पंजाबी भाषा के सम्मान व प्रचार का संदेश दिया।

मार्च की अध्यक्षता पंजाब के पर्यटन व संस्कृति मामले विभाग के सलाहकार दीपक बाली ने की। इस अवसर पर संत निर्मल दास जोड़ा वालों, गायक मनप्रीत औलख, गुरलेज अख्तर और अली ब्रदर सहित कई प्रसिद्ध कलाकार उपस्थित रहे। इसके अलावा सांसद अशोक मित्तल, मंत्री महेंद्र भगत, राजविंदर कौर थियाड़ा और डीसी हिमांशु अग्रवाल भी कार्यक्रम में शामिल हुए। विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने भी बड़ी संख्या में भाग लेकर मातृभाषा के प्रति अपना समर्थन जताया।

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संविधान चौक पर खत्म हुआ मार्च

यह जागृति मार्च लायलपुर खालसा स्कूल से शुरू होकर डा. अंबेडकर चौक, भगवान वाल्मीकि चौक, श्रीराम चौक और नामदेव चौक से होते हुए संविधान चौक पहुंचा। इसके बाद मार्च देश भगत यादगार हाल में समाप्त हुआ, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पंजाबी संस्कृति से जुड़े गीत, कविता और प्रस्तुतियां दी गईं।

दीपक बाली ने कहा कि इस मार्च का मुख्य उद्देश्य पंजाबी भाषा को बढ़ावा देना और युवाओं में अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना पैदा करना है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिए और इसे दैनिक जीवन में अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए।

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सरकार ने भाषा सम्मान में उठाए बड़े कदम

सांसद अशोक मित्तल ने पंजाब सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब सभी विभागों के नाम पंजाबी में अंकित किए जा रहे हैं, जो भाषा सम्मान की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि बच्चा जन्म के बाद सबसे पहले अपनी मां बोली में ही बोलना सीखता है, इसलिए मातृभाषा दिवस का महत्व और भी बढ़ जाता है।

संत निर्मल दास ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब का संदेश भी पंजाबी भाषा में है और यह भाषा अब विश्वभर में फैल चुकी है। उन्होंने सभी से अपनी मां बोली को अपनाने और आगे बढ़ाने की अपील की।

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