मानवता शर्मसार: स्वजन ने शव पहचानने के बाद भी लेने से किया इनकार, ओडिशा पुलिस ने किया अंतिम संस्कार
सड़क हादसे में एक महिला की मौत के बाद उसके परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया। ...और पढ़ें
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चांदीपोष थाना पुलिस। (जागरण)
HighLights
सड़क हादसे में महिला की दुखद मौत।
परिजनों ने शव लेने से किया इनकार।
चांदीपोष पुलिस ने किया अंतिम संस्कार।
जागरण संवाददाता, राउरकेला। समाज में मानवीय संवेदनाओं और खून के रिश्तों की अहमियत पर सवाल खड़े करने वाली एक बेहद विचलित घटना सामने आई है।
एक सड़क हादसे में जान गंवाने वाली महिला के शव की उसके स्वजन ने शिनाख्त तो कर ली, लेकिन उसे अंतिम संस्कार के लिए ले जाने से साफ इनकार कर दिया।
अंततः खाकी ने अपना फर्ज निभाते हुए मानवता की मिसाल पेश की और पुलिसकर्मियों ने ही मृतका को मुखाग्नि देकर उसे अंतिम विदाई दी।
मृतका की पहचान 52 वर्षीय रतानी मुंडा के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उनकी पहली शादी लहूणीपाड़ा थाना क्षेत्र के हल्दीकाछी गांव निवासी शुकुरु मुंडा से हुई थी, जिनसे उनके तीन बेटे हैं।
लगभग 15-16 साल पहले पति के निधन के बाद वह परिवार से अलग हो गई थीं। इसके बाद रतानी ने सरधापुर गांव के सनाराम मुंडा से दूसरी शादी कर ली और वहीं रहने लगी थीं।
बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। चार अगस्त को बोनाईगढ़ अस्पताल में इलाज कराने के बाद वह छह अगस्त को घर लौट रही थीं। बीमार होने के बावजूद वह करीब 18 किलोमीटर का सफर पैदल ही तय कर रही थीं।
इसी दौरान एनएच-143 पर मधुपुर के पास एक अज्ञात वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। इस दर्दनाक हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद चांदीपोष पुलिस ने शव को बणई स्थित मोर्चरी में रखवा दिया और उनकी पहचान के साथ-साथ स्वजन की तलाश में जुट गई। जांच के दौरान पुलिस ने उनकी दोनों शादियों के बारे में जानकारी जुटाई और उनके परिवार वालों से संपर्क किया।
स्वजन ने अपनाने से किया मना
सूचना मिलने पर स्वजन मोर्चरी पहुंचे और मृतका की शिनाख्त भी की, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने हर किसी को सन्न कर दिया। स्वजन ने शव को अपनाने और अंतिम संस्कार के लिए ले जाने से साफ मना कर दिया।
जब शव लेने के लिए कोई भी अपना आगे नहीं आया, तो चांदीपोष पुलिस ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली और पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया।
इस घटना ने पारिवारिक जिम्मेदारियों और बुनियादी मानवीय मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जो महिला अपने अंतिम दिनों में घर वापसी की राह तलाश रही थी, उसे अंत में अपनों का कंधा तक नसीब नहीं हुआ।
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