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पेट में जाने की बजाय नाक से बाहर निकल रहा था दूध, ओडिशा में पहली बार मां बनी 'माया' के दोनों शावकों की मौत

Published: Mon, 14 Sep 2026 12:10 PM (IST)

नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में शेरनी माया के दोनों नवजात शावकों की मौत हो गई है। एक शावक जन्म के समय ...और पढ़ें

माया शेरनी। फाइल फोटो

माया शेरनी। फाइल फोटो

HighLights

  1. नंदनकानन में शेरनी माया के दोनों नवजात शावकों की मौत।

  2. एक शावक मृत जन्मा, दूसरा तीन दिन बाद चल बसा।

  3. दूसरे शावक की मौत का कारण जन्मजात बीमारी क्लेफ्ट पैलेट।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए निराशाजनक खबर सामने आई है। शेरनी माया द्वारा जन्मे दोनों नवजात शावकों की मौत हो गई है।

इनमें एक शावक जन्म के समय ही मृत पाया गया था, जबकि दूसरा नर शावक तीन दिन तक जीवन के लिए संघर्ष करने के बाद दम तोड़ गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दूसरे शावक की मौत का कारण जन्मजात बीमारी बताया गया है।

जानकारी के अनुसार, शेरनी माया ने सात सितंबर को पहली बार दो शावकों को जन्म दिया था। यह उसका पहला प्रसव था। शावकों के जन्म के बाद से ही नंदनकानन प्रशासन की ओर से उन पर विशेष निगरानी रखी जा रही थी। हालांकि जन्म के साथ ही दोनों शावकों की स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक बनी हुई थी।

नाक के रास्ते बाहर निकल रहा था दूध

जू अधिकारियों के मुताबिक, पहला शावक मृत अवस्था में पैदा हुआ था। इसके बाद दूसरे शावक को बचाने के लिए लगातार प्रयास किए गए, लेकिन उसकी हालत भी सामान्य नहीं थी। जन्म के बाद से ही उसे मां का दूध पीने में दिक्कत हो रही थी।

वह दूध पीने की कोशिश करता था, लेकिन दूध पेट में जाने के बजाय नाक के रास्ते बाहर निकल रहा था। इससे उसे पर्याप्त पोषण नहीं मिल पा रहा था और उसकी स्थिति लगातार कमजोर होती चली गई।

तीसरे दिन शावक की मौत के बाद उसका पोस्टमार्टम कराया गया। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि वह क्लेफ्ट पैलेट (तालू का जन्मजात दोष) से पीड़ित था।

इस बीमारी में मुंह के ऊपरी हिस्से यानी तालू का विकास पूरी तरह नहीं हो पाता, जिससे नवजात के लिए दूध निगलना मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में दूध नाक के रास्ते बाहर निकलने लगता है। माया के शावक में भी यही लक्षण दिखाई दे रहे थे।

पहली बार मां बनी थी माया

विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त पोषण नहीं मिलने और जन्मजात शारीरिक दोष के कारण शावक की स्थिति लगातार बिगड़ती गई। तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।

माया के लिए यह पहला मातृत्व अनुभव था। उसने पहली बार दो शावकों को जन्म देकर मां बनने का सुख पाया था, लेकिन कुछ ही दिनों में दोनों बच्चों को खो दिया।

इस घटना से न केवल नंदनकानन प्रशासन बल्कि वन्यजीव प्रेमियों में भी मायूसी छा गई है। शेरों के संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रमों के लिहाज से नवजात शावकों का जन्म महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में दोनों शावकों का जीवित नहीं रह पाना नंदनकानन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

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