ओडिशा के बालेश्वर में बाढ़ का कहर जारी: भोगराई में स्लूइस गेट टूटा, 3 पंचायतों में घुसा पानी
बालेश्वर जिले में सुवर्णरेखा, जलका और बूढ़ाबलंग नदियों की बाढ़ से गंभीर स्थिति बनी हुई है, जिससे 41 पंचायतों के ...और पढ़ें

ओडिशा में उफनाई नदी। फोटो जागरण
HighLights
बालेश्वर में सुवर्णरेखा, जलका नदियों से तीसरी-सातवीं बाढ़।
भोगराई में 200 साल पुराना स्लूइस गेट टूटा, पानी भरा।
बाढ़ में डूबने से एक महिला और एक पुरुष की मौत।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। बाढ़ ने एक बार फिर बालेश्वर जिले में तबाही मचा दी है। सुवर्णरेखा नदी की इस वर्ष की तीसरी और जलका नदी की सातवीं बाढ़ के साथ-साथ बूढ़ाबलंग नदी के उफान ने जिले में गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। बालियापाल, भोगराई, जलेश्वर, बस्ता और रेमुणा ब्लॉक के कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
जिला प्रशासन के अनुसार, पांच ब्लॉकों की 41 पंचायतों के 232 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। करीब 1,90,974 लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि 52,393 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
बालियापाल ब्लॉक के 24 गांव पूरी तरह जलमग्न हैं और 89 गांव आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं। भोगराई में 14 गांव पूरी तरह और 42 गांव आंशिक रूप से पानी से घिरे हुए हैं। बस्ता के 6 तथा रेमुणा के 42 गांवों में भी बाढ़ का असर देखा गया है।
बालियापाल में 20 से अधिक प्रमुख सड़कें डूब जाने से संपर्क व्यवस्था बाधित हो गई है। 10 से अधिक पंचायतों के नलकूप और पाइप जलापूर्ति परियोजनाएं पानी में डूब जाने से पेयजल संकट गहरा गया है। आरडब्ल्यूएसएस की ओर से बोतलबंद पानी वितरित किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है।
200 साल पुराना स्लूइस गेट टूटा
भोगराई ब्लॉक के भुआबांध स्थित लगभग 200 वर्ष पुराने नंबर-7 स्लूइस गेट के देर रात करीब 3 बजे टूट जाने से स्थिति और बिगड़ गई। इसके कारण टुकुरिहाजिरा, पसरबिंधा और निजामपुर पंचायतों में करीब छह घंटे तक बाढ़ का पानी प्रवेश करता रहा। बाद में जल संसाधन विभाग ने लोहे के गेट, पेड़ों की डालियों और बालू की बोरियों की मदद से अस्थायी मरम्मत कर स्थिति को नियंत्रित किया।
सास और बेटे को बचाने में महिला की मौत
भोगराई ब्लॉक के कुलिदा गांव की सुमति जेना (31) नाव से गिर पड़े अपने बेटे और सास को बचाने के लिए बाढ़ के पानी में कूद गईं, लेकिन स्वयं डूब जाने से उनकी मौत हो गई।
वहीं, कमर्दा थाना क्षेत्र के नाचिंदा गांव निवासी सन्न्यासी राज बाढ़ के पानी में मछली पकड़ने के लिए जाल लगाते समय डूब गए और उनकी भी मृत्यु हो गई।
तीन-चार दिन और लग सकते हैं
जिलाधिकारी सूर्यवंशी मयूर विकास ने बताया कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है और नियमानुसार प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बालियापाल और भोगराई के प्रभावित क्षेत्रों से पानी पूरी तरह निकलने में अभी तीन से चार दिन और लग सकते हैं।
नदियों का जलस्तर
राजघाट में सुवर्णरेखा नदी का चेतावनी स्तर 9.45 मीटर और खतरे का स्तर 10.36 मीटर है। सुबह 7 बजे नदी का जलस्तर 11.68 मीटर तक पहुंच गया था, जो शाम 4 बजे तक घटकर 10.35 मीटर रह गया।
इसी प्रकार, मथानी में जलका नदी का जलस्तर अभी भी चेतावनी स्तर 6.28 मीटर से ऊपर बना हुआ है, जबकि गोविंदपुर में बूढ़ाबलंग नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर 5.68 मीटर से नीचे दर्ज किया गया है।
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