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ओडिशा में अब मिनटों में होगी जमीन की रजिस्ट्री, भूमि रिकॉर्ड से सीधे जुड़ेगा डेटा

Published: Thu, 03 Sep 2026 08:08 PM (IST)

ओडिशा सरकार ने जमीन और संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को सरल, तेज और डिजिटल बनाने के लिए कदम उठाए हैं। अब ...और पढ़ें

ओडिशा में जमीन पंजीकरण अब होगा पूरी तरह डिजिटल और कागजरहित (AI Generated Image)

ओडिशा में जमीन पंजीकरण अब होगा पूरी तरह डिजिटल और कागजरहित (AI Generated Image)

HighLights

  1. पंजीकरण प्रक्रिया अब पूरी तरह कागजरहित और डिजिटल होगी।

  2. दस्तावेज चार पन्नों तक सीमित होंगे, प्रक्रिया तेज होगी।

  3. आधार वैकल्पिक, भूमि रिकॉर्ड से सीधा जुड़ाव होगा।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा में जमीन और संपत्ति के पंजीकरण की प्रक्रिया अब और सरल, तेज और डिजिटल होने जा रही है। राज्य सरकार ने कागजरहित दस्तावेज पंजीकरण (पेपरलेस डीड रजिस्ट्रेशन) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है।

इसके लिए पंजीकरण अधिनियम, 1908 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी की अध्यक्षता में लोक सेवा भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में प्रस्तावित संशोधनों पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद पंजीकरण प्रक्रिया एंड-टू-एंड डिजिटल होगी। पंजीकरण दस्तावेजों को चार पन्नों तक सीमित करने का प्रस्ताव है। इससे दस्तावेज तैयार करने से लेकर पंजीकरण और प्रमाणपत्र जारी करने तक की प्रक्रिया अधिक आसान और कम समय लेने वाली होगी।

आठ प्रावधानों में संशोधन, नौ नए प्रावधान जुड़ेंगे

प्रस्तावित संशोधनों के तहत पंजीकरण अधिनियम के आठ मौजूदा प्रावधानों में बदलाव किया जाएगा, जबकि नौ नए प्रावधान जोड़े जाएंगे। इलेक्ट्रॉनिक बुक, इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर और इलेक्ट्रॉनिक सील को कानूनी मान्यता देने का प्रावधान होगा।

पंजीकृत दस्तावेजों और उनके इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के साथ उनकी डिजिटल प्रतियों को भी कानूनी वैधता मिलेगी।

नागरिक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पंजीकरण के लिए दस्तावेज जमा कर सकेंगे। निर्धारित मामलों में इलेक्ट्रॉनिक उपस्थिति और पूछताछ की सुविधा भी उपलब्ध होगी। संपत्ति के पंजीकरण रिकॉर्ड को यूनिक प्रॉपर्टी आइडेंटिफिकेशन नंबर अथवा सरकारी भूमि अभिलेखों से जुड़े पहचान नंबर से जोड़ा जाएगा।

आधार होगा विकल्प, अनिवार्यता नहीं

प्रस्तावित व्यवस्था में नागरिकों की सहमति से आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से पहचान सत्यापन की सुविधा मिलेगी। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि आधार को अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा।

ऑफलाइन सत्यापन, आधिकारिक रूप से वैध दस्तावेज, ई-दस्तावेज और अन्य निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भी पहचान की पुष्टि की जा सकेगी।

भूमि रिकॉर्ड से सीधे जुड़ेगा पंजीकरण

नई डिजिटल व्यवस्था में पंजीकरण रिकॉर्ड को भूमि अभिलेख, कैडस्ट्रल मानचित्र, राजस्व रिकॉर्ड, शहरी स्थानीय निकायों, योजना प्राधिकरणों और वित्तीय संस्थानों सहित अन्य सरकारी प्रणालियों से जोड़ा जाएगा।

पंजीकरण रिकॉर्ड, भूमि रिकॉर्ड और म्यूटेशन रजिस्टर के एकीकरण से नामांतरण की प्रक्रिया भी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से शुरू और पूरी की जा सकेगी।

बिक्री विलेख समेत कई दस्तावेजों के होंगे मानक प्रारूप

सरकार बिक्री विलेख, बिक्री समझौता, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी और अचल संपत्ति के बंधक जैसे दस्तावेजों के लिए मानक प्रारूप तैयार करेगी। निर्धारित श्रेणी के दस्तावेजों का पूरी तरह ऑनलाइन पंजीकरण किया जा सकेगा।

डिजिटल पंजीकरण प्रमाणपत्र पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर और इलेक्ट्रॉनिक सील होगी तथा उसे भौतिक प्रमाणपत्र के समान कानूनी मान्यता प्राप्त होगी। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आपदा की स्थिति में डेटा की पुनर्प्राप्ति के लिए भी कानूनी प्रावधान किए जाएंगे।

राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य पंजीकरण व्यवस्था को पारदर्शी, सरल, तेज, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित बनाना है। भूमि अभिलेखों और पंजीकरण रिकॉर्ड के डिजिटल एकीकरण से लोगों को बेहतर और सुविधाजनक सेवाएं मिलेंगी।