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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 12, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

'खामोशी' को मिली बुलंद आवाज

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Updated: Tue, 12 Aug 2014 09:10 AM (IST)

सिर्फ हरि सिंह ही नहीं। हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे एडवोकेट यशपाल सिंह अपने बेबाक विचारों से लोगों को जागरूक करने की मुहिम में करीब 16 साल से जुटे ह ...और पढ़ें

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बरेली [जासं]। सिर्फ हरि सिंह ही नहीं। हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे एडवोकेट यशपाल सिंह अपने बेबाक विचारों से लोगों को जागरूक करने की मुहिम में करीब 16 साल से जुटे हैं। जहां भी अधिकारों के हनन की सूचना मिलती है, लोगों को अपनी बात रखने [अभिव्यक्त करने] में रोड़े अटकाने सूचना मिलती है, वे जुट जाते हैं बिना किसी स्वार्थ के। प्रशासन से लेकर शासन तक को जगाने के लिए पूरी जान लगा देते हैं। कानूनी पेचीदगियों को संविधान के दायरे में रहकर मुंह तोड़ जवाब देते हैं।

प्रमाणपत्रों की लड़ी जंग

यशपाल ने यूं तो अभिव्यक्ति की आजादी की जंग 1998 से लड़ रहे हैं, लेकिन बड़ा मुद्दा युवाओं के प्रमाण पत्रों की समस्या को बनाया। उन युवाओं की दिक्कत को शिद्दत से महसूस किया, जो तहसीलों में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध चाहकर भी आवाज नहीं उठा पा रहे थे। यशपाल ने न केवल ऐसे युवकों की मदद की बल्कि उनकी आवाज आला अधिकारियों तक पहुंचाई। उन्होंने बिन मां-बाप की बच्ची को अपने विचारों की जंग से हक दिलाया। दरअसल, तहसीलदार ने बच्ची का आय प्रमाण पत्र इसलिए नहीं बनाया क्योंकि उसने अपनी नानी को अभिभावक बनाया था। तब यशपाल ने लड़की के हक की कानूनी लड़ाई लड़ी। उसको प्रमाण पत्र जारी कराया। वह कहते हैं-संविधान हमें बोलने का अधिकार देता है, लेकिन भ्रष्ट तंत्र के सामने हमारी आवाज कमजोर पड़ जाती है।

यशपाल का प्रोफाइल

यशपाल पीयूसीएल [पब्लिक यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी] जिसके संस्थापक जय प्रकाश नारायण हैं, उसकी जिला इकाई के अध्यक्ष हैं। हाईस्कूल की पढ़ाई के दौरान आर्मी में जाना चाहते थे, लेकिन मौका नहीं मिला। पुलिस के लिए प्रयास किया लेकिन यहां भ्रष्टाचार ने बढ़ने नहीं दिया। आवाज उठाई लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। उसी दिन से उन्होंने तय कर लिया कि लोगों को जगाएंगे। 1998 में 12वीं की पढ़ाई के दौरान उन्होंने सामाजिक संगठन से जुड़कर ऐसे लोगों की मदद करना शुरू की जो चाहकर भी बोल नहीं पाते। तब से लेकर आज तक उनका यह दौर जारी है। वे अनवरत ऐसे लोगों को आवाज देने का काम बखूबी करते आ रहे हैं।

हौसलों को पंख देने की कोशिश

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