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'मैं माफी मांगता हूं...', तमिलनाडु के मंत्री ने बिना सम्मान लिया करुणानिधि का नाम तो बोले सीएम विजय

Published: Tue, 18 Aug 2026 08:51 AM (IST)

तमिलनाडु विधानसभा में एक मंत्री द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि का नाम बिना सम्मानजनक संबोधन के लेने पर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने तुरंत माफी मांगी।

विधानसभा में तमिलनाडु के सीएम सी जोसेफ विजय। (फोटो- एएनआई।)

विधानसभा में तमिलनाडु के सीएम सी जोसेफ विजय। (फोटो- एएनआई।)

HighLights

  1. मंत्री ने करुणानिधि का नाम बिना सम्मानजनक संबोधन लिया।

  2. विपक्षी डीएमके ने विधानसभा में इस पर कड़ा विरोध किया।

  3. मुख्यमंत्री विजय ने मंत्री की ओर से तुरंत माफी मांगी।

डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को एक मंत्री द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि का नाम बिना किसी सम्मानजनक संबोधन के सीधे लेने पर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने तुरंत माफी मांगी।

राज्य के वन मंत्री आर.वी. रंजीत कुमार ने डीएमके के दिग्गज नेता का नाम लेते समय कलैगनार (विद्वान) शब्द का इस्तेमाल नहीं किया, जबकि विधानसभा में उन्हें इसी सम्मानजनक उपाधि से संबोधित करने की परंपरा है। मंत्री की इस टिप्पणी पर विपक्षी पार्टी डीएमके ने तुरंत विरोध जताया।

मंत्री की ओर से सीएम विजय ने मांगी माफी

मर्यादा भंग होने पर विपक्ष के विरोध को शांत करने के लिए मुख्यमंत्री ने दखल दिया। उन्होंने माना कि दिवंगत नेता को इस तरह संबोधित करना गलत था और अपने मंत्री की ओर से साफ तौर पर माफी मांगी। विधानसभा में तनाव कम करते हुए विजय ने कहा, "मैं उनकी ओर से माफी मांगता हूं।"

क्या है मामला?

विरोध तब शुरू हुआ जब रंजीत कुमार ने स्वास्थ्य और राजस्व विभागों के लिए अनुदान की मांगों पर बहस के दौरान वोट के बदले पैसे देने की पुरानी रणनीतियों की आलोचना की। उन्होंने विवादित तिरुमंगलम फॉर्मूला का जिक्र करते हुए दावा किया कि पिछले चुनावों में उनके कांचीपुरम निर्वाचन क्षेत्र में प्रति वोट 1,500 रुपये तक बांटे गए थे।

पिछले चुनावों और मौजूदा प्रशासन की तुलना करते हुए वन मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार वोटों के लिए पैसे बांटे बिना सत्ता में आई है। हालांकि, चुनावी रणनीतियों का जिक्र करते समय उन्होंने डीएमके के वरिष्ठ नेता एम. करुणानिधि को सिर्फ करुणानिधि कहा और उनके लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सम्मानजनक शब्दों जैसे कलैगनार या पूर्व मुख्यमंत्री का जिक्र नहीं किया।

डीएमके ने किया विरोध

इस तरह सीधे नाम लेने से तमिलनाडु विधानसभा की एक पुरानी परंपरा का उल्लंघन हुआ, जिसके तहत सम्मानित नेताओं को पारंपरिक रूप से औपचारिक पदवी या सम्मानजनक शब्दों के साथ संबोधित किया जाता है। शिष्टाचार के इस उल्लंघन पर विपक्ष की डीएमके पार्टी के सदस्यों ने तुरंत और जोरदार विरोध किया।

बढ़ते तनाव को कम करने के लिए विजय ने बहस के पटरी से उतरने से पहले ही बीच-बचाव किया। मुख्यमंत्री ने वन मंत्री को भाषण के बीच में ही रोकते हुए माना कि दिवंगत नेता का उस तरह से जिक्र करना अनुचित था।

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