TVK सरकार के 100 दिन: सीएम विजय ने तय कीं प्राथमिकताएं, अब शुरू होगी असली परीक्षा
तमिलनाडु में सीएम विजय की TVK सरकार ने 100 दिन पूरे होने पर '100 डेज ऑफ गवर्नेंस' रिपोर्ट कार्ड जारी किया है।
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TVK सरकार के 100 दिन। (पीटीआई)
HighLights
महिलाओं की सुरक्षा, कृषि ऋण माफी, मुफ्त बिजली प्रमुख पहलें।
शिक्षा, रोजगार, निवेश पर सरकार का विशेष ध्यान।
कल्याणकारी वादों के कार्यान्वयन की असली चुनौती अब शुरू।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलमाडु की मुख्यमंत्री विजय की सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद, उनकी सरकार ने '100 डेज ऑफ गवर्नेंस: ए गवर्नमेंट फॉर जेरेरेशन्स' नाम से एक विस्तृत रिपोर्ट कार्ड जारी किया है, जिनमें उन फैसलों, योजनाओं और निवेशों का जिक्र है जिन्होंने शुरुआती महीनों को खास बनाया है।
दिलचस्प बात है यह है कि जब अभिनेता से राजनेता बने विजय ने इस साल मई में अपनी पार्टी 'तमिलगा वेट्री कजगम' (TVK) को सत्ता दिलाई, तो लोगों ने सवाल उठाए कि क्या कोई अभिनेता सरकार चला पाएगा?
महिलाओं के लिए खास टास्क फोर्स, नशीले पदार्थों के खिलाफ यूनिट और स्कूलों, मंदिरों व बस स्टैंड के पास सैकड़ों शराब की दुकानों को बंद करना - ये सभी सरकार के 100 दिन के रिपोर्ट कार्ड का हिस्सा हैं।
सबसे पहले लोगों का कल्याण
विजय कई तरह के कल्याणकारी वादों के साथ चुनाव में उतरे थे, और उनमें से कुछ सबसे अहम वादों को सबसे पहले लागू किया गया है। पद संभालने के पहले ही दिन, विजय सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक खास 'सिंगप्पेन स्पेशल टास्क फोर्स' का गठन किया।
सरकार ने 'वेट्री मगालीर बकरी पालन योजना' भी शुरू की है, जिसके तहत ग्रामीण आजीविका और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के मकसद से ज़रूरतमंद महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों को पांच बकरियां या भेड़ें दी जाएंगी।
शिक्षा और आवास
शिक्षा पर भी काफी ध्यान दिया गया है। सरकार का कहना है कि 'कामराजार नाश्ता योजना' का विस्तार किया गया है, जिससे 15,414 स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक के 15.14 लाख और छात्रों को फायदा होगा।
कॉलेज के छात्रों के लिए लैपटॉप देने के मकसद से 2,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जबकि सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 11 के छात्रों को हेलमेट और पानी की बोतलों के साथ ब्रांडेड साइकिलें दी जाएंगी।
किसानों पर ध्यान
पहले 100 दिनों में किसानों पर भी खास ध्यान दिया गया है। विधानसभा में बोलते हुए विजय ने बताया कि मई में सरकार बनने के 15 दिनों के अंदर ही सरकार ने 50,000 रुपये तक के कृषि ऋण माफ कर दिए थे।
बाद में इसे और बढ़ाया गया, जिससे 75,000 रुपये तक के ऋण पूरी तरह माफ कर दिए गए और 75,000 रुपये से ज्यादा के ऋण पर 35,000 रुपये की छूट दी गई, इससे 14.44 लाख से ज्यादा किसानों को फायदा हुआ।
सरकार ने 6,000 करोड़ रुपये के फ़सल ऋण माफी की भी घोषणा की है, साथ ही गन्ने के लिए 4,000 रुपये प्रति टन और धान के लिए 2,750 रुपये प्रति क्विंटल का प्रोत्साहन भी दिया है।
रोजगार और कौशल विकास
विजय के रिपोर्ट कार्ड में रोजगार और कौशल विकास को भी अहम जगह दी गई है। 'वेट्री स्किल ट्रेनिंग स्कीम' के तहत, सरकार का कहना है कि 12 लाख छात्रों और एक लाख युवाओं ने कौशल विकास प्रशिक्षण लिया है।
'वेट्री 150 स्कीम' में 150 दिनों के पक्के रोज़गार का वादा किया गया है। साथ ही, सरकार ने TN-VETTRI के ज़रिए रोज़मर्रा की नागरिक सुविधाओं पर ध्यान देने की कोशिश की है, जिसके तहत पानी की आपूर्ति, ठोस कचरा प्रबंधन, साफ़-सफ़ाई और ग्रामीण कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए हर साल 6,000 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे।
मुफ्त बिजली
मुफ्त बिजली उन शुरुआती वादों में से एक थी जिसे विजय के नेतृत्व वाली TVK सरकार ने सत्ता संभालने के तुरंत बाद पूरा किया। उनकी सरकार ने उन घरेलू उपभोक्ताओं के लिए हर दो महीने में 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की जो 500 यूनिट तक बिजली का इस्तेमाल करते हैं।
साथ ही, मुफ्त बिजली देने से नई सरकार के शुरुआती महीनों के खर्चों का बोझ भी बढ़ गया है। विजय इन कल्याणकारी वादों और राज्य की आर्थिक स्थिति के बीच कैसे तालमेल बिठाते हैं, यह सरकार के शुरुआती कुछ महीनों के बाद ही साफ हो पाएगा।
निवेश पर जोर
अगर विजय के पहले 100 दिनों का एक पहलू कल्याणकारी योजनाएं रही हैं, तो दूसरा पहलू यह दिखाना रहा है कि तमिलनाडु में निवेश को बढ़ावा देना उनकी सरकार के एजेंडे में शामिल है।
अब शुरू होगी असली परीक्षा
हालांकि पहले सौ दिन यह दिखाने के लिए काफी हो सकते हैं कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं, लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इन पहलों ने कैसा काम किया है। विजय ने अपनी शासन नीति में पारदर्शिता लाने की भी कोशिश की है, जिसके तहत योजनाओं को तेजी से मंजूरी देना और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन जैसे कदम उठाए गए हैं।
लेकिन यहां भी असली परीक्षा यह होगी कि क्या नागरिकों को सच में ऐसी सरकार का अनुभव होता है जो तेज, पारदर्शी और जिसके साथ काम करना आसान हो। ये सभी उपाय अब एक मुश्किल चरण में पहुंच गए हैं, जो है इनका कार्यान्वयन (इम्प्लीमेंटेशन)।
सरकार को यह दिखाना होगा कि कल्याणकारी योजनाएं असल में लाभार्थियों तक पहुंच रही हैं, निवेश के वादे प्रोजेक्ट और नौकरियों में बदल रहे हैं, और महिलाओं की सुरक्षा, ड्रग्स और शराब पर ध्यान देने से ज़मीन पर साफ नतीजे दिख रहे हैं। एक सवाल यह भी है कि राज्य अपने कल्याणकारी वादों के साथ-साथ बढ़ते खर्च का बोझ कितनी आसानी से उठा सकता है।
फिलहाल, शुरुआती 100 दिनों ने विजय की प्राथमिकताएं तय कर दी हैं। अब भी यह सवाल बना हुआ है कि क्या अगले कुछ सौ दिनों में घोषणाओं की रफ्तार के मुताबिक काम भी हो पाएगा।
