सोनम वांगचुक को 5 मिनट में कैसे ले गई पुलिस? विपक्ष ने बताया तानाशाही, अन्ना बोले- बातचीत करने में क्या हर्ज है?
पेपर लीक के खिलाफ अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से जबरन हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। ...और पढ़ें
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सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से जबरन हटाने पर भड़का विपक्ष

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संजय मिश्र, नई दिल्ली। पेपर लीक के खिलाफ शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगुचक को जबरन जंतर-मंतर से उठाकर अस्पताल में भर्ती कराए जाने की कार्यवाही ने सियासी पारे को बढ़ा दिया है।
विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को तानाशाही करार देते हुए मोदी सरकार पर लोकतंत्र तथा संविधान की मर्यादा को छिन्न-भिन्न करने का लगाया आरोप।
कांग्रेस और सपा से लेकर विपक्षी गठबंधन आईएनडीआईए के तमाम दलों ने कहा कि जंतर-मंतर से महिला पहलवानों को घसीटने से लेकर पूर्व सैनिकों के साथ बदसलूकी करने तक वर्तमान सरकार ने बार-बार लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलते हुए संविधान के प्रति अपना अनादर दिखाया है।
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने वांगचुक को अनशन स्थल से हटाने को पूरी तरह गलत ठहराते हुए कहा कि देश के छात्रों का मुद्दा उठाने वालों को कोई भी ताकत रोक नहीं सकती।
विपक्ष ने सरकार की कार्रवाई को बताया तानाशाही
वांगचुक को शनिवार सुबह जंतर-मंतर से हटाए जाने के खिलाफ चौतरफा उठी आवाजों से खुद को जोड़ते हुए एक्स पर पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा, 'असत्य और हिंसा मोदी सरकार के दो मुख्य सिद्धांत हैं। सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाना, जबकि वे अहिंसक भूख हड़ताल पर थे, गलत है।
पेपर लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत और छात्रों की आत्महत्या भारत के भविष्य के लिए गंभीर मुद्दे हैं। कोई भी ताकत छात्रों और हममें से उन लोगों को जो उनसे प्यार करते हैं और उनमें विश्वास रखते हैं, इन मुद्दों को उठाने से नहीं रोक सकती।'
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खरगे ने किया जी डी अग्रवाल का जिक्र
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वांगचुक के खिलाफ कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा, '111 दिन तक मां गंगा को बचाने के लिए आमरण अनशन पर बैठे प्रोफेसर जी डी अग्रवाल हों या हरियाणा की ओलिंपिक महिला पहलवान हों, हमारे 750 अन्नदाता किसान, दलित-आदिवासी हों या फिर पेपर लीक की बलि चढ़े 25 बच्चे और उनके परिजन। इस तानाशाह सरकार ने किसी को नहीं बख्शा।
इनकी नजर में कोई भी अगर आवाज उठाता है तो वह राष्ट्र-विरोधी, परजीवी है। जंतर-मंतर पर आज जो हुआ वह लोकतंत्र और संविधान के ऊपर एक और काला धब्बा है।
कोटा और देहरादून से 'छात्रों की गूंज' का आगाज हो चुका है। दिल्ली की दहलीज तक जरूर पहुंचेगा।' सपा प्रमुख अखिलेश यादव, शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत से लेकर विपक्ष के तमाम अन्य नेताओं ने वांगचुक का समर्थन करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला।
पुलिस के बर्ताव की निंदा करते हैं: कनिमोझी
आईएनडीआईए गठबंधन से दूरी बनाने के बावजूद द्रमुक ने इस मामले में विपक्ष के स्वर में स्वर मिलाते हुए वांगचुक को जबरन अनशन स्थल से हटाने की निंदा की।
द्रमुक की वरिष्ठ नेता कनिमोझी ने एक्स पोस्ट में कहा दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जिस तरह घसीटा और जबरदस्ती अस्पताल में भर्ती कराया उस बर्ताव की हम निंदा करते हैं।
केंद्र सरकार को उनसे सार्थक बातचीत करनी चाहिए क्योंकि वांगचुक ने लगातार हमारी शिक्षा प्रणाली की अखंडता को लेकर महत्वपूर्ण चिंताएं उठाई हैं।
इन चिंताओं पर ईमानदारी और रचनात्मक प्रतिक्रिया मिलनी चाहिए और उनके साथ सम्मान तथा गरिमा के साथ पेश आना चाहिए। सबसे बढ़कर उनकी सेहत और जिंदगी को सर्वोच्चा प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सोनम वांगचुक से वार्ता करे केंद्र सरकार : अन्ना हजारे
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार को शिक्षाविद् सोनम वांगचुक से बातचीत करनी चाहिए। अन्ना हजारे ने वीडियो संदेश में कहा, सरकार को उनके सब्र की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। (उनकी मांगों को लेकर) हां कहें या न, लेकिन बातचीत करने में क्या हर्ज है?
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को जंतर-मंतर पर उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन तबीयत बिगड़ने के बाद शनिवार को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। लोकपाल कानून को लेकर दिल्ली में अन्ना हजारे के अनशन ने वर्ष 2011 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को हिला दिया था।