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    'क्या पीड़ित परिवार को नौकरी नहीं मिलनी चाहिए...', करूर भगदड़ मामले में SC से विजय सरकार को राहत; HC के फैसले पर रोक

    Updated: Fri, 14 Aug 2026 01:31 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को रद्द करने वाले मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा ...और पढ़ें

    करूर भगदड़ मामले में SC से विजय सरकार को राहत (फाइल फोटो)

    करूर भगदड़ मामले में SC से विजय सरकार को राहत (फाइल फोटो)

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के इस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें करूर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को रद कर दिया गया था।

    न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनवाई के दौरान सरकार की इस राहत नीति पर सवाल उठाने वाले याचिकाकर्ता को फटकार लगाई और तमिलनाडु के मुख्य सचिव व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया।

    सवाल उठाने वाले आप कौन होते हैं?

    पीटीआई के अनुसार, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने त्रासदी से प्रभावित परिवारों को रोजगार प्रदान करने की सरकार की नीति को चुनौती देने के आधार पर सवाल उठाया।

    जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता से पीठ ने कहा, "सरकार की नीति पर सवाल उठाने वाले आप कौन होते हैं? मान लीजिए कि त्रासदी में परिवार के इकलौते सदस्य की मृत्यु हो गई, तो क्या सरकार को उनके बेटे या बेटी को कोई रोजगार नहीं देना चाहिए?"

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार को अंतरिम राहत मिली है, जिसने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी।

    क्या है पूरा मामला?

    गौरतलब है कि पिछले साल 27 सितंबर को करूर जिले के वेलुसामीपुरम में टीवीके प्रमुख विजय की एक प्रचार सभा के दौरान भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई। इस दौरान 41 लोगों की मौत हो गई थी।

    इस दुर्घटना के बाद तमिलनाडु सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने के लिए नियुक्ति आदेश जारी किए थे। लेकिन तमिलनाडु सरकार के इस फैसले को 'नाम तमिलर काची' के थीरन थिरुमुरुगन और अधिवक्ता सीनी अहमद ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच में चुनौती दी थी।

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    मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस कार्तिकेयन और जस्टिस शक्तिवेल की खंडपीठ ने सरकार के आदेश को रद कर दिया था। जिसके बाद तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

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