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सिंधु जल संधि पर कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को भारत ने किया खारिज, कहा- ये आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं

By Jaiprakash RanjanEdited By: Garima Singh
Published: Mon, 31 Aug 2026 05:38 PM (IST)Updated: Mon, 31 Aug 2026 11:00 PM (IST)

भारत ने हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (पीसीए) द्वारा सिंधु जल संधि पर सुनाए गए फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है।

भारत ने सिंधु जल संधि पर आर्बिट्रेशन के फैसले को पूरी तरह नकारा

भारत ने सिंधु जल संधि पर आर्बिट्रेशन के फैसले को पूरी तरह नकारा

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जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय विवादों की मध्यस्थता करने वाली हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (पीसीए) की तरफ से सिंधु जल संधि पर सुनाये गये फैसले को भारत सरकार ने एक सिरे से खारिज कर दिया है।

पाकिस्तान की अपील पर पीसीए ने सोमवार को सिंधु जल संधि पर फैसले सुनाये हैं। एक फैसला उक्त संधि की स्थिति को लेकर है जबकि दूसरा यह है कि क्या दोनों में से कोई एक देश इस संधि को खारिज कर सकता है।

अदालत ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पूरी तरह लागू है और भारत को संधि के तहत अपनी बाध्यताओं का पालन करना चाहिए।

पीसीए के फैसले को भारत ने सिरे से किए खारिज

अदालत ने भारत के संधि को 'स्थगित' रखने के फैसले को संधि को निलंबित या समाप्त करने के प्रयास के रूप में देखा है और कहा कि संधि किसी एक पक्ष को इसे समाप्त, निलंबित या स्थगित करने का अधिकार नहीं देती। कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में रतले जलविद्युत परियोजना पर कुछ निर्माण कार्यों पर अस्थायी रोक लगाने का भी निर्देश दिया है।

पीसीए के फैसले को एक सिरे से खारिज करते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा है कि यह तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय विश्व बैंक द्वारा संधि की शर्तों का खुला उल्लंघन कर गठित किया गया था।

भारत इस अवैध रूप से गठित निकाय के अस्तित्व को कभी नहीं मानता और इसके पहले के सभी फैसले भी खारिज कर चुका है। भारत इस निकाय के समक्ष कभी उपस्थित नहीं हुआ और इसके किसी भी फैसले को मान्यता नहीं देता।

भारत के संप्रभु फैसलों पर कोई कोर्ट का अधिकार क्षेत्र नहीं है: MEA

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस तथाकथित न्यायालय को भारत के संप्रभु फैसलों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। इसके वर्तमान या भविष्य के किसी भी फैसले का भारत द्वारा चलाए जा रहे परियोजनाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारत का सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का निर्णय पहले की तरह लागू रहेगा।

सूत्रों का कहना है कि पहलगाम हमले के बाद अप्रैल, 2025 में भारत ने साफ कर दिया था कि वह सिंधु जल समझौते को तब तक नहीं मानेगा जब तक सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने को लेकर पाकिस्तान के रवैये में पूरा बदलाव नहीं आये।

भारत अभी भी इसी रुख पर अडिग है। चूंकि नई दिल्ली हेग स्थित उक्त अदालत को अवैध मानती है और उसके समक्ष पेश भी नहीं हुई, इसलिए वह फैसले को नजरअंदाज कर सकती है। साथ ही रतले सहित अपनी जलविद्युत परियोजनाओं का काम जारी रख सकती है और संधि को स्थगित रखने की नीति पर अडिग रह सकती है।

साथ ही भारत पाकिस्तान से संधि की शर्तों में संशोधन या नई व्यवस्था की बात अपने हिसाब से आगे बढ़ा सकता है, क्योंकि उसका कहना है कि बदलती परिस्थितियों में पुरानी संधि अब व्यावहारिक नहीं रही।

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