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मानसून फिर पकड़ेगा रफ्तार, 10 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; राजस्थान-गुजरात में बरसात पर अल्प-विराम

Published: Tue, 08 Sep 2026 11:00 PM (IST)

बंगाल की खाड़ी में बने नए मौसमी सिस्टम के कारण मानसून की विदाई टल गई है, जिससे पूर्व से लेकर ...और पढ़ें

मानसून की अभी नहीं होगी विदाई (फोटो-पीटीआई)

मानसून की अभी नहीं होगी विदाई (फोटो-पीटीआई)

HighLights

  1. बंगाल की खाड़ी में नए सिस्टम से मानसून की विदाई टली।

  2. पूर्व से उत्तर-पश्चिम राज्यों में बारिश का नया दौर संभव।

  3. अलनीनो के कारण तापमान बढ़ेगा, रबी फसलों पर असर।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अनुमान लगाया जा रहा था कि मानसून निर्धारित समय 17 सितंबर से करीब एक सप्ताह पहले लौटना शुरू कर सकता है, लेकिन बंगाल की खाड़ी में बन रहे नए मौसमी सिस्टम ने इसकी विदाई की संभावना को टाल दिया है। इसके प्रभाव से पूर्व से लेकर उत्तर-पश्चिम के राज्यों तक बारिश का एक और दौर शुरू हो सकता है।

स्काईमेट के उपाध्यक्ष महेश पलावत के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बनने जा रहे निम्न दबाव क्षेत्र के चलते नमी लेकर हवा उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ेगी।

अभी नहीं जाएगा मानसून

इसके असर से पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बंगाल में बारिश जारी रह सकती है।

प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली तक पहुंच सकता है। ऐसे में सितंबर के मध्य में उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है।

हालांकि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, पश्चिमी मध्य प्रदेश में अगले चार दिनों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। नए सिस्टम के सक्रिय होने पर 12 से 14 सितंबर के बीच इन क्षेत्रों में वर्षा हो सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन-चार दिनों में पूर्वी भारत में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है। 10 सितंबर को ओडिशा में बहुत भारी बारिश हो सकती है।

11 से 14 सितंबर के दौरान छत्तीसगढ़, तटीय आंध्र प्रदेश और तेलंगाना तथा 13-14 सितंबर को मध्य प्रदेश में भारी बारिश की संभावना है।

सामान्य तौर पर मानसून की वापसी की शुरुआत राजस्थान से 17 सितंबर के आसपास होती है और 15 अक्टूबर तक पूरे देश से विदा हो जाता है। इस बार अलनीनो की स्थिति मजबूत रहने के चलते तापमान अधिक हो सकता है।

इसका प्रभाव सर्दी और अगले साल गर्मी की शुरुआत पर भी पड़ सकता है। इससे रबी फसलों की बुवाई के समय तापमान और नमी की स्थिति किसानों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।

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