मेघालय हाई कोर्ट ने रद की यूपी के छात्रों की FIR, होमस्टे विवाद में सुनाया फैसला
मेघालय उच्च न्यायालय ने शिलांग के एक होमस्टे में तोड़फोड़ और धमकी देने के मामले में उत्तर प्रदेश के छह छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद कर दी है।

मेघालय हाई कोर्ट का फैसला (फाइल फोटो)
HighLights
मेघालय हाई कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ एफआईआर रद्द की।
होमस्टे विवाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ।
छात्रों ने मुआवजा दिया, सामुदायिक सेवा भी करेंगे।
डिजिटल डेस्क, शिलांग। शिलांग में एक होमस्टे में तोड़फोड़ करने और धमकी देने के मामले में उत्तर प्रदेश के छह छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआइआर को मेघालय उच्च न्यायालय ने रद कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे की अदालत ने दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बनने के बाद यह आदेश पारित किया। होमस्टे के मैनेजर और मालिक ने एफआइआर रद करने पर अपनी सहमति दे दी थी।
मेघालय हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला
यह घटना 11 जुलाई को शिलांग के लैटुम्ख्राह थाने में दर्ज की गई थी। आरोप था कि कमरे में तय संख्या से अधिक मेहमानों को ठहरने की अनुमति न मिलने पर छात्रों ने होमस्टे में तोड़फोड़ की और शिकायतकर्ता को धमकी दी।
इसके बाद बंगाल से 13 जुलाई को सभी छह आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें बाद में जमानत मिल गई थी। इनमें तीन नाबालिग (एक 15 और दो 17 वर्ष के), एक 18 वर्ष का और दो अन्य छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
बुजुर्गों और शुभचिंतकों के हस्तक्षेप से 17 अगस्त को दोनों पक्षों में समझौता हुआ। समझौते के तहत छात्रों ने होमस्टे मालिक को मुआवजे के तौर पर 2.06 लाख रुपये दिए और अपनी हरकत के लिए बिना शर्त माफी मांगी।
कोर्ट ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एफआइआर तो रद कर दी, लेकिन दो वयस्क छात्रों पर अतिरिक्त शर्तें लगाईं। इन दोनों को एक सप्ताह के भीतर 25-25 हजार रुपये और देने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा उन्हें छह दिनों की सामुदायिक सेवा भी पूरी करनी होगी। इन छात्रों को आठ सितंबर से शिलांग के लचुमिएर स्थित सिख सेंटर श्री गुरु सिंह सभा में सुबह 10 से शाम पांच बजे तक तीन दिन बिताना होगा।
इसके अलावा वे 'जीवा केयर्स' के 'प्रोजेक्ट आपरेशन क्लीन-अप' के तहत उमख्राह नदी की सफाई और शहर में स्वच्छता गतिविधियों में सहयोग करेंगे।
अदालत ने इस सेवा की अनुपालन रिपोर्ट 15 सितंबर को पेश करने का निर्देश दिया है। कम उम्र के अन्य चार छात्रों को सामुदायिक सेवा से छूट दी गई है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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