भारत की चीन को दो टूक, जयशंकर ने उठाया India-China बॉर्डर पर शांति का मुद्दा
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीनी समकक्ष वांग यी से मनीला में मुलाकात के दौरान सीमा पर शांति, व्यापार घाटा और बाजार पहुंच जैसे प्रमुख मुद्दों को ...और पढ़ें
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भारत की चीन को दो टूक (फोटो-एएनआइ)
HighLights
जयशंकर ने चीन से सीमा पर शांति और स्थिरता की मांग की।
भारत-चीन व्यापार घाटा और बाजार पहुंच का मुद्दा उठाया।
बहुध्रुवीय एशिया के लिए भारत की स्पष्ट मंशा व्यक्त की।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की बैठक बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई, लेकिन भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने द्विपक्षीय संबंधों को पूरी तरह सामान्य बनाने की राह में बाधक बने सभी प्रमुख मुद्दों को एक-एक करके साफ तौर से उठाया।
सीमा क्षेत्रों में शांति और अमन को सामान्य संबंधों की प्रमुख शर्त बताते हुए जयशंकर ने चीन के पक्ष में भारी व्यापारिक घाटे, बाजार पहुंच की कमी और कुछ जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति में चीन की तरफ से बाधा उत्पन्न करने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर स्पष्ट चिंता जताई। दोनों मंत्री फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान के उच्च स्तरीय कार्यक्रमों में शामिल होने पहुंचे थे।
भारत-चीन सीमा पर शांति और स्थिरता की मांग
बैठक के दौरान जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सामान्य संबंधों की पूर्व शर्त है। वर्ष 2020 में चीन की तरफ से पूर्वी लद्दााख में घुसपैठ किये जाने के बाद से यह भारत का सतत रुख है।
जयशंकर ने कहा कि, 'अक्टूबर 2024 से दोनों पक्ष इस महत्वपूर्ण उद्देश्य को सुनिश्चित करने के लिए लगे हुए हैं, लेकिन इस पर निरंतर ध्यान देने की जरूरत है। दो बड़े पड़ोसी देशों के रूप में भारत और चीन के अपने-अपने हित स्वाभाविक हैं, लेकिन उनके मतभेद विवाद में नहीं बदलने चाहिए।'
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साथ ही भारतीय विदेश मंत्री ने बहु-धुव्रीय एशिया बनाने की भारत की मंशा भी बगैर किसी लाग-लपेट के बताते हुए कहा कि, 'हमारा मानना है कि पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक हित और पारस्परिक संवेदनशीलता के आधार पर ही स्थिर और सहयोगपूर्ण संबंध विकसित किए जा सकते हैं। ऐसा संबंध बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय विश्व में मूल्यवान योगदान दे सकता है।' सनद रहे कि चीन बहुधुव्रीय एशिया बनाने की बात को स्वीकार नहीं करता।
बैठक में जयशंकर ने रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए हाल के दिनों में उठाये ग ये कदमों जैसे सीधी उड़ानों, वीजा व्यवस्था को शुरू करने, कैलाश मानसरोवर यात्रा की शुरुआत का स्वागत किया। उन्होंने ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता के दौरान चीन के समर्थन की सराहना भी की।
जयशंकर ने इन सभी विकासों का जिक्र करते हुए कहा कि संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन अभी भी कई चुनौतियां बाकी हैं।
बैठक में जयशंकर ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक स्थिति बेहद जटिल है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर विचारों का आदान-प्रदान उचित है। लेकिन व्यापार और आर्थिक मुद्दों पर जयशंकर ने साफ चिंता जताई।
विदेश मंत्री ने कहा कि निष्पक्ष बाजार पहुंच और व्यापार संतुलन संबंधों का महत्वपूर्ण आयाम है। भारत को चीन के साथ भारी व्यापारिक घाटे का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही आपूर्ति शृंखलाओं की अनिश्चितता और कुछ जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति में होने वाली रुकावटों पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
भारत का यह मानना है कि चीन भारतीय उत्पादों को अपने यहां प्रवेश नहीं करने देता और इसकी राह में रोड़े अटकाता है।
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