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Gen-Z को करियर में क्या चाहिए? विदेश में पढ़ाई करने से मुंह फेर रहे, वर्क-लाइफ बैलेंस पर स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा

Published: Tue, 01 Sep 2026 08:29 PM (IST)

एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जेनजी युवा करियर में बड़े पद की बजाय काम और निजी जिंदगी के संतुलन को अधिक महत्व दे रहे हैं।

करियर को लेकर जेन-जी की सोच अलग (AI जेनरेटेड फोटो)

करियर को लेकर जेन-जी की सोच अलग (AI जेनरेटेड फोटो)

HighLights

  1. जेनजी युवा पद से अधिक वर्क-लाइफ बैलेंस को महत्व देते हैं।

  2. विदेश में पढ़ाई का आकर्षण घटा, भारत में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा पसंद।

  3. 'पाथवे मॉडल' शिक्षा में छात्रों की रुचि तेजी से बढ़ रही है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जेनरेशन जेड यानी जेन-जी के लिए करियर का मतलब सिर्फ बड़ा पद, ऊंची सैलरी या किसी कंपनी में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचना नहीं रह गया है। इस पीढ़ी के युवा काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं।

एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, 74 प्रतिशत जेनजी युवाओं ने औपचारिक लीडरशिप पद हासिल करने के बजाय वर्क-लाइफ बैलेंस को प्राथमिकता दी है। वहीं, 65 प्रतिशत का मानना है कि सफल करियर के लिए एग्जीक्यूटिव लीडर बनना जरूरी नहीं है।

वैश्विक शैक्षिक कंपनी एमेरिटस की रिपोर्ट

भारत की जेन-जी आउटलुक 2026: शिक्षा, महत्वाकांक्षा और सफलता का नया आकलन- नो कैप जेनरेशन में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट 15 से 28 वर्ष की उम्र के 1,010 युवाओं के सर्वे पर आधारित है।

सर्वे में कॉलेज से पहले की पढ़ाई कर रहे युवाओं, उच्च शिक्षा में प्रवेश के संक्रमण दौर से गुजर रहे छात्रों और करियर की शुरुआत कर चुके युवाओं को शामिल किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, जेनजी के नजरिए में करियर की पारंपरिक सीढ़ी को लेकर बदलाव आया है। इस पीढ़ी ने नौकरी की असुरक्षा, छंटनी और वीजा से जुड़ी अनिश्चितताओं को करीब से देखा है। ऐसे में उनके लिए करियर में आगे बढ़ने के साथ-साथ निजी जिंदगी और काम के बीच संतुलन भी महत्वपूर्ण हो गया है।

विदेश की पढ़ाई का आकर्षण घटा

विदेश जाकर पढ़ाई करने का पारंपरिक विकल्प भी जेनजी के बीच पहले जितना आकर्षक नहीं रह गया है। रिपोर्ट के अनुसार, विदेश में पढ़ाई पर विचार करने वाले 48 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि पिछले एक साल में उनकी रुचि कम हुई है।

इसके पीछे पढ़ाई का बढ़ता खर्च, वीजा की शर्तें और पढ़ाई के बाद वहां काम करने के नियमों को लेकर अनिश्चितता प्रमुख वजहें हैं। सबसे ज्यादा गिरावट अमेरिका में पढ़ाई की रुचि में देखी गई है।

इसके उलट भारत में रहकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा हासिल करने का विकल्प युवाओं को तेजी से आकर्षित कर रहा है। प्री-कॉलेज समूह के 87 प्रतिशत और संक्रमण के दौर से गुजर रहे 92 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि वे भारत में किसी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटी के प्रोग्राम में पढ़ने के लिए तैयार या बहुत ज्यादा तैयार हैं।

संक्रमण समूह के 69 प्रतिशत युवाओं ने वीजा संबंधी अनिश्चितता से बचने के लिए विदेश जाने के बजाय भारत में उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय प्रोग्राम को प्राथमिकता देने की बात कही।

भारत में पढ़ाई, विदेशी कैंपस का अनुभव

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑन-कैंपस पढ़ाई अब भी युवाओं की पहली पसंद है, लेकिन पाथवे मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसमें छात्र भारत में पढ़ाई करते हैं और बाद में विदेशी विश्वविद्यालय के मुख्य कैंपस में कुछ समय बिताने या सेमेस्टर एक्सचेंज का मौका पाते हैं।

प्री-कॉलेज छात्रों में 27 प्रतिशत और संक्रमण समूह में 39 प्रतिशत ने इस माडल में रुचि दिखाई। यानी जैसे-जैसे छात्र दाखिले के फैसले के करीब पहुंचते हैं, भारत में रहकर अंतरराष्ट्रीय शिक्षा हासिल करने का यह विकल्प उन्हें ज्यादा आकर्षक लगता है।

एमेरिटस के सह-संस्थापक और सीईओ अश्विन डमेरा ने कहा कि दशकों तक करियर का रास्ता काफी स्पष्ट माना जाता था- अच्छे अंक, इंजीनियरिंग, मेडिकल, सीए, सरकारी नौकरी या एमबीए और फिर करियर। लेकिन अब यह रास्ता तेजी से बदल रहा है।

अश्विन डमेरा के मुताबिक, तकनीक और एआइ के कारण काम की दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहा है। ऐसे में युवाओं के लिए बदलते कौशल और अवसरों को समझना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।

रिपोर्ट का उद्देश्य भी यह समझना है कि जेनजी शिक्षा, तकनीक और करियर की बदलती दुनिया को किस तरह देख रहे हैं।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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