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UPSC सिविल सेवा परीक्षा में किसे मिलेगा OBC आरक्षण का लाभ? क्रीमी लेयर स्टेटस पर सुनवाई के लिए तैयार सुप्रीम कोर्ट

Published: Tue, 01 Sep 2026 05:31 PM (IST)Updated: Tue, 01 Sep 2026 10:23 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट केंद्र की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है, जिसमें ओबीसी क्रीमी लेयर के मानदंडों ...और पढ़ें

OBC क्रीमी लेयर स्टेटस पर सुनवाई के लिए तैयार सुप्रीम कोर्ट (फोटो-पीटीआई)

OBC क्रीमी लेयर स्टेटस पर सुनवाई के लिए तैयार सुप्रीम कोर्ट (फोटो-पीटीआई)

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट OBC क्रीमी लेयर पर केंद्र की याचिका सुनेगा।

  2. सिविल सेवा परीक्षा-2025 के परिणामों पर अनिश्चितता बनी हुई है।

  3. सभी पक्षों को 17 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा-2025 के परिणामों और उसके बाद की प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता के बादल गहराते नजर आ रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस याचिका पर विचार करने पर सहमति जता दी है, जिसमें 11 मार्च को दिए गए अपने उस फैसले पर स्पष्टीकरण की मांग की गई है, जो ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के क्रीमी लेयर के मानदंडों से जुड़ा हुआ है।

17 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इस मामले में नोटिस जारी करते हुए सभी पक्षों को 17 सितंबर तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के समक्ष अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि इस वर्ष के चयनित अभ्यर्थियों की पोस्टिंग और सेवा आवंटन की प्रक्रिया चल रही है।

ऐसे में, यदि 11 मार्च के फैसले को अचानक लागू किया जाता है, तो इससे भारी व्यावहारिक परेशानियां खड़ी हो जाएंगी और कई योग्य उम्मीदवार असमंजस की स्थिति में आ जाएंगे।

सरकार का मुख्य तर्क यह है कि सिविल सेवा परीक्षा-2025 की पूरी चयन प्रक्रिया, यानी नोटिफिकेशन से लेकर अंतिम परिणाम घोषित होने तक, पुराने नियमों और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के तहत पूरी हो चुकी थी।

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने कोर्ट से आग्रह किया है कि 958 अनुशंसित उम्मीदवारों के सेवा आवंटन को पुराने मानदंडों के आधार पर ही आगे बढ़ने की अनुमति दी जाए, ताकि उन उम्मीदवारों के साथ न्याय हो सके जिन्होंने पिछली कानूनी स्थिति के आधार पर परीक्षा में हिस्सा लिया था।

दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने सरकार की इस याचिका की स्वीकार्यता पर प्रारंभिक आपत्ति जताई है।

कोर्ट ने इन दलीलों पर संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया है कि याचिका की स्वीकार्यता के बिंदु पर 17 सितंबर को विस्तार से सुनवाई की जाएगी। अब देखना यह है कि कोर्ट इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामले में क्या अंतिम निर्णय लेता है, जिस पर सैकड़ों युवाओं का भविष्य टिका हुआ है।

क्या है OBC क्रीमी लेयर स्टेटस?

क्रीमी लेयर के तहत OBC के उन अपेक्षाकृत संपन्न वर्गों की पहचान की जाती है जिन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के तहत मिलने वाले आरक्षण को दो कैटेगरी में बांटा गया है- नॉन-क्रीमी लेयर और क्रीमी लेयर।

इन दोनों कैटेगरी में मुख्य अंतर यह है कि OBC नॉन-क्रीमी लेयर नौकरी और शिक्षा में सरकारी आरक्षण के फायदों के लिए योग्य होती है, जबकि OBC क्रीमी लेयर नहीं।

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